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मौजूदा फिज़ा

ज़ब्त बेअसर न हो जाय कहीं,
 मेरा ज़र्फ है की सम्हाले हुए हूँ मैं |
 इत्तिहाद किस तौर मेह्फूज़ हो ,
बैचैन हूँ बस, मैं खामोश हूँ ||
अमर स्नेह 
इत्तिहाद – भाईचारा