मिस्टर एक्स


©अमर स्नेह

Vishwamitrएक बॉब-कट जींन्सधारी आधूनिक महिला पुलिस चौकी में अपनी शिकायत दर्ज करवाने आई। उसने डयूटी पे तैनात ऑफिसर को पूरी बात बताकर रिर्पोट दर्ज करने की पेशकश की तभी एक के बाद एक, वैसी ही शिकायतों के फोन भी आने लगे। इस बीच एक दो और लोग भी वैसी ही शिकायत लेकर थाने में आ गए। मामला संगीन देखकर सब इंस्पेक्टर ने शिकायत करने वालों को बैठा दिया और दो-तीन पुलिस कर्मियों को साथ ले मौके पर पहुँच गए। एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर जब वो  थाने वापिस आए तो सबने पहचान लिया ये वही व्यक्ति है।

जिस व्यक्ति को हिरासत में लेकर आए देखने में वो व्यक्ति बहुत संभ्रान्त मालूम दे रहा था। उसने सब इंस्पेक्टर को हिदायत दी कि ये मामला उसके मौलिक अधिकारों से सम्बंधित है और धार्मिक भी है, इसमें पुलिस ने अगर दख़ल दी तो अच्छा नहीं होगा। सब इंस्पेक्टर सकते में आ गया और घबराया हुआ एक दूसरे कमरे में जाकर अपने सीनियर से विचार-विमर्श करने लगा।

आधूनिक महिला मीडिया से संबन्धित थी। रिर्पोट न दर्ज किए जाने पर उसने फोन करके न्यूज चेनल वालों को बुला लिया। महिला ने चेनल वालों को बताया कि वो जो संभ्रात दिखने वाले महानुभाव बैठे हैं उन्होने उसे सड़क पर पकड़ लिया और जब वो चिल्लाई तो बहाना बना कर नारायण नारायण करने लगे। वहाँ मौजूद और लोगों ने भी इसी तरह के बयान दिए। मीडिया वालो ने जब उन महाशय से पूछा तो उन्होने फिर वही बात कही कि, ‘‘ देखिए ये मेरा व्यक्तिगत धार्मिक मामला है और मैने संतो की वाणी जो शास्त्रो से ही प्रेरित है, उसके अनुसार आचरण किया है -देखिए मैं प्रभू को ढूंढ रहा हूँ। – “नारायण इस जगत में सबसे मिलिए धाय। न जाने किस भेष में नारायण मिल जाँए।।“ – मैं हर व्यक्ति में भगवान को ढूंढ़ता हूँ आप इसे और कुछ न समझे, ये अत्यंत धार्मिक मामला है यदि आप लोग भगवान नहीं है तो मुझे जाने दें, मैं पुनः अपनी तलाश जारी रखता हूँ।’’

टी.वी. रिर्पोटर ने जब उनसे पूछा कि आप अपना ये धार्मिक कर्म अपने घर में ही क्यों नहीं करते, तो उन्होने उत्तर दिया, ‘‘ देखिए मेरे घर में कोई सड़क नहीं है जहाँ से मनुष्यों का आना जाना होता हो और वैसे भी धर्म अब सड़को पे उतर आया है, चाहे राम जन्म भूमि का मामला हो, चाहे राम सेतू का, चाहे राम रहीम का, अमरनाथ का, चाहे अल्लाह की सेवा में बम बलास्टों का।………सड़को पर ही जिधर देखिए भगवान के मन्दिर ही मन्दिर है और अब उसे सडकों पर ही खोजा जाएगा। मेरा निवेदन है मेरी ईश्वर की तलाश में पुलिस या कानून बाधा न बने, वर्ना मुझे देश के धर्म रक्षको से मदत लेनी पड़ेगी। कुछ ही देर बाद अभियुक्त श्री एक्स के घर वाले भी पुलिस स्टेशन पर पहुँच गए। उन्होने शिकायत कर्ताओं और अफसरों से उनके इस कृत्य के लिए बार-बार क्षमा माँगी तो श्री एक्स को मानसिक रोगी समझ कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।

अभी इस हादसे को हुए कुछ ही दिन बीते होगें कि श्री एक्स की पत्नि ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उनके पति बड़ी संदिग्ध परिस्थिति में घर से गायब हो गए है। उन्होने बताया कि रोज उनके एकान्त निवास में रात में ही सुबह बदलने के लिए उनके साफ कपड़े रख दिए जाते है और ब्रह्मवेला में वो स्नान करके कपड़े बदल कर भक्ति में लीन हो जाते है। कल रात भी साफ कपड़े उनके लिए रखवा दिए गए थे लेकिन आज सुबह जब वो नाश्ता लेकर उनके कमरे में गई तो वो कमरे में नहीं थे। उनके साफ कपड़े ज्यों के त्यों वैसे ही रखे थे और उनके रात में पहने कपड़े भी वही उतरे पड़े मिले। न जाने वो अपने पहने लिबास में से निकल कर कहाँ गायब हो गए। उन्हे हर स्थान पर ढूंढा गया लेकिन उनका कही भी पता नहीं चल रहा हैं।

शरीर से आत्मा निकल कर चली जाए तो बन्दे का शरीर तो रहना चाहिए लेकिन लिबास में से निकल कर मुज्सिम आदमी गायब हो जाना बड़ी विचित्र घटना है। पुलिस के काफी ढूढ़ने के बाद जब श्री एक्स का कोई पता न चला तो मीडिया एक्शन में आ गया और शंका प्रसारित की जाने लगी कि किसी दूसरे ग्रह के लोग उड़न तश्तरी से आकर उन्हे ले गए होगें। इस बात से एलियन और उड़न तश्तरी पर नजर रखने वाली विश्वस्तरीय एजेन्सियाँ भी खोज बीन करने आ गई और मीडिया पर इस हादसे को लेकर हुड़दंग मच गई। अब तो विदेशों में भी उन्हें ढूढ़ने की प्रक्रियाएँ शुरू हो गई। टी.वी. पर लगातार उड़़नतश्तरियों और एलियन्स के कल्पना चित्र प्रसारित किये जा रहे है कि क्या किसी ने आकाश से उतरती किसी एैसी अजनबी और विचित्र चीज को देखा है और अगर देखा है, तो फौरन अमुक-अमुक टोल फ्री फोन नम्बरों पर सूचित किया जाये। -पूरे विश्व में लोग टी.वी. से जुड़े बैठे इस अद्भुत घटना पर नज़र रखे है कि भारत के इंसान का मुज्सिम शरीर लिबास में से निकल कर गया तो गया कहाँ।

आज सुबह होते ही एक टी.वी. चेनल ने ढोल-नगाड़ो के साथ ब्रेकिंग बिग न्यूज के लम्बे-लम्बे केप्शन्स दिखाते हुए गला फाड़-फाड़ कर शोर मचाना शुरू कर दिया कि केवल हमारे इस  विशेष चेनल ने श्री एक्स  की मिस्ट्री को सॉल्व कर लिया हैं। हमारे चेनल ने पुलिस और सी.आई.डी. से भी पहले, श्री एक्स का पता लगा लिया है – कुछ ही देर में आपको वो दुर्लभ चित्र जो हमारी केमरा टीम हमें उस दुर्गम स्थान से भेज रहीं है जो आपको शीघ्र दिखाए जाएंगे, आप अपने टी.वी. सेट न छोडि़एगा, बिना मुँह धोए ही सांस रोक कर बैठे रहें।

किसी इन्फारमर (सूचना देने वाला) की सूचना से चेनल श्री एक्स तक पहुँचा था और चेनल की सूचना से खोजी पुलिस भी अब श्री एक्स तक पहुँच चुकी है। लेकिन पुलिस के पहुँचने पहले ही धर्म धुरन्दरों के दस्ते वहाँ मौजूद पाए गए। -पास के ही जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे श्री एक्स कोपीन (लंगोट) धारण किए आँख बन्द ध्यान मुद्रा में राम-राम जप रहें हैं और उनके पीछे एक कपड़े पर दोहा लिखा है। ‘‘ राम-राम जपते रहो जब लग घट में प्राण। कबहूँ तो दीन दयाल के भनक पड़ेगी कान।। ’’

बेचारी खोजी पुलिस कर्मियों के पास केवल दंडवत करने के अलावा कोई और कारवाही करने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। इस घटना के प्रसारित होने के बाद विध्युत गति से धर्म गुरूओं की सैनाएँ आकाश-पाताल और जमीन से निकल मय साजों सामान और शस्त्रों के साथ उस स्थान पर पहुंचने लगी । उन्होने लम्बी घेराबन्दी करके आनन-फानन इस स्थान को ‘‘ महा धार्मिक कलयुगी तपस्या स्थली ’’ घोषित कर दिया है और धर्म गुरूओं द्वारा तपस्वी जी के चारों ओर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी गई, और उसके अंदर प्रवेश निषेध कर दिया गया। श्री एक्स की पत्नि और बच्चों को भी अंदर जाने नहीं दिया जा रहा हैं। धर्म गुरूओं की सैनाओं ने देखते ही देखते दूर-दूर तक तम्बू और झन्डे लगा दिए है -धर्म सैनाओं ने आनन-फानन ‘ महा धार्मिक कलयुगी तपस्या स्थली ’ का बोर्ड लगा कर वहाँ रक्षा के लिए हनुमान जी को भी स्थापित कर दिया है। अब वहाँ चारों ओर तम्बू झन्डे और धर्म-चैकसी-सैना ही नजर आ रही है।

श्री एक्स के परिवार के लोग विलाप करते हुए श्री एक्स के प्राणों को पल-पल जाते देख नहीं पा रहे हैं। उनकी पत्नि ने सरकार से दरख्वास्त की कि उनके पति को इस तरह प्राण त्यागने से रोका जाए। उन्होने अपने पति के खिलाफ आत्महत्या करने की रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी। धर्म गुरूओं, महागुरूओं, पीठाधीशों के फतवों पे फतवे और चेतावनियां जारी होने लगीं है, उनका कहना है कि ‘‘अब ये न तो किसी के घर परिवार का मामला है और न ही कानून का । शास्त्रों के अनुसार श्री एक्स गृह त्याग कर तपस्या में लीन हैं इसलिए अब उनके परिवार वालों का उनसे कोई संम्बध नहीं रह गया है और वस्त्र, अन्न-जल के त्याग से उनका संसार से भी अब नाता समाप्त हो चुका है। धर्म साधक ईश्वर को पाने के लिए धर्म-यात्रा में है, सब कुछ शास्त्र सम्मत हो रहा है। अतः तपस्वी जी के तप की रक्षा की जायगी और अगर किसी भी तरह से पुलिस, सरकार, न्यायलय और परिवार वालो ने श्री एक्स की तपस्या में विघ्न डाला तो उन्हे राक्षस घोषित करके धर्म-युद्ध किया जाएगा। पूरे देश में हमारी धर्म सैनाएँ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। धर्म विरूद्ध किसी भी कारवाही के होते ही वो सैनाएँ एयरपोर्ट, रेल्वे स्टेशनों, देश के महामार्गो की ओर अग्रसर हो जाएगीं और धर्म की रक्षा के लिए उन्ही सब लीलाओं की पुनरावृति कर डालेगी जिनका आजाद भारत में प्रचलन आम है। ’’

पूरे देश में विधि-वेत्ताओं, धर्म गुरूओं, बुद्धि जीवियों और पुलिस में एक बहस शुरू हो चुकी है। मामला बहुत ही विषम होता जा रहा है। इस मामले को लेकर जलूस निकलने लगे है जहाँ-तहाँ सभाएँ भी होने लगीं है। हर चेनल पर और पूरे मीडिया में बहस-मुहासा शुरू हो गया। द्वापर-त्रेता युग से लेकर कलयुग तक के प्रिंटिगं मशीन और कागज के अविष्कार होने से पहले के, मानस में संग्रहित देवताओं, ऋषियों-मुनियों, भगवानों-अवतारों द्वारा डिक्टेटिड (लिखवाईं) एवं रचित कथाओं के ग्रंथों से लेकर भगवान द्वारा दी गई स्पीचों का यथावत और तथाकथ वर्णन तथा हमारे पन्डितो और स्वर्गिक आनन्द भोगी बाबाओं द्वारा इस मामले को लेकर शास्त्रार्थ भी टी.वी. पर प्रसारित किया जा रहा है। कुल मिला कर अभी तक इस विषय में स्थिति यथावत तो है लेकिन श्री एक्स धीरे-धीरे परमधाम की ओर खिसक रहे है। ये देखकर श्री एक्स के घरवालों की चिन्ताएँ और भी बढ़ने लगी है।

श्री एक्स की पत्नि को इस स्थिति में एक युक्ति सूझी और उन्होने टी. वी. चेनल पर इसका खुलासा भी कर दिया। परिणाम स्वरूप उनके पती की प्राण रक्षा के लिए कुछ ही देर बाद भारी संख्या में युवक-युवतियों ने उनसे संम्पर्क किया और  जल्दी-ज्ल्दी सारे प्रबन्ध करके वो सभी तपस्या स्थली पर जा पहुँचे। लेकिन धर्म चैकसी सैनाओं ने उन्हे अंदर आने से रोक दिया। काफी बहस-मुहासे के बाद उन्हे धर्म गुरूओं से मिलने की इजाज़त मिल गई। वहाँ भी काफी समय तक तकरार और वाक-युद्ध हुआ। इस बीच और भी बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ वहाँ एक बेनर लिए पहुँच गए, जिस पर लिखा है मेनका विश्वामित्र सैना। इस सैना की घोषणा के बाद तो इस शहर की ही नहीं दूर-दूर की नर्तकियाँ और नर्तक मय मेकअप और वाध्य यंत्रो के साथ तपस्या स्थली पर आते ही जा रहे हैं। गुरूओं से काफी शास्त्रार्थ के बाद सभी सैनाओं में एक समझौता हुआ कि अगर सूरज डूबने से पहले मैनकाएँ तपस्वी की तपस्या भंग करने मे सफल हूई तो ठीक है वर्ना उनकी सैना को हार मान कर वापिस जाना पड़ेगा और तपस्या इसी प्रकार जारी रहेगी।

समय कम रह गया है जल्दी ही सारे प्रबन्ध करके प्रतियोगिता शुरू कर दी गई। कोमलांगी, कमनीय नृत्यांगनाओं ने जब वाध्य यंत्रों और कोकिल कंठी स्वर साधकों के साथ मंथर गति से रम्भा-सम्भा शुरू किया तो बहिर जगत, अंतर जगत और ब्रह्मलोक में कुछ हल-चल होने लगी। तपस्या-लीन श्री एक्स, श्रवणेन्द्रियों के माध्यम से अपने अंतर जगत में अनुभव कर रहे कि वो ब्रह्मलोक में स्वर्ग-द्वार के पास तक पहुँच चुके है, लेकिन यहाँ पृथ्वी पे मेनका विश्वामित्र सैना के हाथ में अब समय बहुत कम बचा है, सूर्यास्त होने में कुछ ही मिनट शेष है। श्री एक्स की पत्नि और परिवार की जान पर बनी हूई है। वो प्रतीक्षा कर रहे हैं कि श्री एक्स कब आँखे खोलेगें।

समय को देखते हुए उत्तोतर संगीत और नृत्य की गति बढा दी गई़ और भारी संख्या में अतिरिक्त नृत्यागनाओं को भी शामिल कर लिया गया। लय ताल पर घुंघरूओं की झन्कार ज्यों-ज्यों बढ़ रही है श्री एक्स उसी गति से स्वर्ग के द्वार की ओर बढ़ रहे है।……… उनके स्वागत में स्वर्ग के द्वार अब खुल चुके है, कुछ ही देर में उन पर पुष्प वर्षा भी होने लगी और घुंघरूओं और वाध्य-वृन्दो की अनुगूंज अब पूरे ब्रह्मलोक में छा गई। ब्रह्मलोक की अप्सराएँ उनके आगमन से हर्षित और पुलकित है, वो उनके करीब आकर उन्हे परमानन्द की अवस्था में पहुँचा रही है। उन्होने अभी किसी अपसरा का कोमल स्पर्श अनुभव किया तो अचानक उनके मुख से स्वर फूटने लगे, ‘‘ हे लीलाधर आपने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे इस ब्रह्मलोक में स्थान दिया मैं आपका आभारी हूँ…….।’’ यह कहते-कहते उनकी आँखे खुल गई और वो आनन्द मगन हो अप्सराओं के साथ नृत्य करने लगे, लेकिन कुछ ही क्षणों में वो कमजोरी महसूस करके रूक गए तो तुरन्त एक अप्सरा ने उन्हे अपने हाथों से पेय पदार्थ का सेवन करवाया, ‘‘….आह ! अमृत है…..’’ ये कहते हुए उन्होने चारों ओर दृष्टिपात किया, ‘‘ आह ! कितना सुन्दर है यहाँ सब कुछ……. लगता है संपूर्ण भारत इसी स्वर्ग में है…….आह ! असंख्य महान विभूतियों के मैं यहाँ दर्शन कर रहा हूँ ………….सच ही लिखा है हमारे ग्रन्थों में कि जिसने पुण्य किया होता है उसे ही भारत की पुण्य भूमि पर जन्म लेने का अवसर मिलता है और जीवन यापन के दौरान हर पाप गंगा में एक डुबकी लगाने से धुल कर वो निष्पाप हो जाते है, वैसे भी पाप करके निष्पाप हो जाने के लिए असंख्य विधि विधान भारत की धरती पर प्राप्त है। असंख्य देवी-देवताओं मे से किसी की भी एक बार आरती सुन या पढ़ लो, यज्ञ-हवन करवा लो, गीता-रामायण का पाठ सुन भर लो तो घोर से घोर पाप क्षमा हो जाते हैं और अनेकानेक पापों से मुक्ति पाकर, धर्म का पालन करने वाला हर भारतीय सीधा स्वर्ग में पधार जाता है मेरी तरह………वाह प्रभू……….वाह ! -इसीलिए तो भारत में हर मृत्यू के बाद कहा जाता है कि स्वर्ग सिधार गए……….जय भारत भूमि ! जय ब्रह्मलोक !!………….।’’ -तभी वहाँ उन्हे उनकी पत्नि दीख पड़ीं तो वो आश्चर्य चकित हो पूछने लगे, ‘‘………आप……..आप यहाँ ?………देखो देवी मैने गृह त्याग कर सांसारिक सबन्धों से मुक्ति पा ली थी………मैं अब स्वतंत्र हूँ………..।’’ -पत्नि ने कुटिल मुस्कान से उनकी ओर देखा, ‘‘ हाँ हाँ ठीक है………मैं तो केवल आपके लिए ये कपड़े लेकर आई हूँ आप लंगोटी में असभ्य…… लेकिन बहुत सेक्सी लग रहे हैं……………।’’

तभी एक अप्सरा (नर्तकी) ने सर हिला कर आग्रह दोहरा दिया ‘‘…………पहन लीजिए तपस्वी जी……….।’’ -उन्होने कपड़े पहन लिए और पत्नि को धन्यवाद देकर अलविदा कहने लगे। फिर कुछ सोचकर पूछने लगे, ‘‘ लेकिन तुम यहाँ आई कैसे।’’ पत्नि ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, ‘‘ वैसे तो कई है लेकिन वो जो एक चेनल है न, जो कृष्णा जी का असली शंख दिखाता है, रावण अभी जिन्दा है बताता है, भिलनी के जूठे बेर राम जी ने खाकर गुठलियाँ जब फैंकी थी तो अब, सीधा उस चेनल के स्टूडियो में ही आकर पड़ी , वही चेनल…. अक्सर जब उनके पास कुछ नहीं होता तो स्वर्ग की सीढ़ी दिखाता है उसे देखकर ही मैं उसी स्वर्ग की सीढ़ी से सीधा यहाँ पहुँच गई…………..किसी से पूछना भी नहीं पड़ा।

– ठीक है तो उसी सीढ़ी से तुम वापिस घर चली जाओ……. ठीक से जाना कहीं गिर-विर न जाना।

– तो क्या अब सीढि़यों तक छोड़ने भी नहीं आओगे?

– नहीं मैं मृत्यू लोक के माया मोह से अब मुक्त हूँ………….।

– अरे आश्रमी-ढोंग त्याग दो………….अभी तो नंगे होकर सुन्दर-सुन्दर सेक्सी लड़कियों के साथ नाच रहे थे और कहते हो माया मोह त्याग दिया है ?………अरे आँखे खोल कर देखो ये पृथ्वी है, स्वर्ग तुम्हारा केवल वहम है वैसे ही जैसे मन गढ़ंत पोथो में रचनाकारों ने पंडितवाद और वर्ण व्यवस्था को जीवित रखने के लिए गढ़ा। अगर आज तुम्हे हमारी मेनका सैना ने बचाया न होता तो तुम भक्ति की झक में बिना मौत मर गए होते।.

– तो क्या ये पृथ्वी है?

– हाँ आँखे खोल कर देखो श्री एक्स जी आप पृथ्वी पर ही है।

– ओह !

– श्री एक्स जिस ईश्वर को तुम ढूंढते हो वो आपके अंतर में ही है, अच्छे-बुरे का अहसास आपको स्वयं ही हो जाता है, ये सब कितना रहस्यमय है न। इस पृथ्वी पर ही स्वर्ग है यदि हम सभ्य होकर जीना सीख जाएँ। इन्सानी सभ्यता ने किसी अनदेखी महान शक्ति की कल्पना की और उसे ईश्वर मान लिया। ये जीवन, ये सृष्टि कितनी विशाल, विषम और गूढ़ है, इंसान सब कुछ जान-समझ ले ये संभव नहीं है इसलिए इंसानी सभ्यता ने किसी परम सत्ता किसी नियंन्ता की कल्पना की और उस परमशक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा का भाव रखा, ईश्वर  इंसान का एक अहसास है वो उससे प्रेरित होता रहे, वो उस ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हो, बस यही उसकी पूजा है। ईश्वर इंसानी सभ्यता का एक एहसास और विश्वास है इसके अलावा कुछ नहीं…………………. मैं चाहती हूँ आप भी हमारी मेनका विश्वामित्र सैना में शामिल हो जाँए।

– इससे क्या होगा?

– हम झखवाद और बकवाद की ग़फलत, आडम्बर और अन्धकार में जीने वालो की आँखे खोलेगे, उन्हे सभ्य बनाने का प्रयास करेगे………लेकिन इससे पहले स्वयं सभ्य बने रहने का संकल्प करेंगे।

– मेरी आँखे आपने खोल दी, मैं संकल्प करता हूँ कि बाकी जीवन सभ्य इन्सान बनाने की तपस्या में गुजारूंगा……।

            इस तपोभूमि पर आज सभी ने सभ्य इन्सान बनने के संकल्प को दोहराते हुए जश्न मनाया और अब हम देख रहे है कि अन्य सैनाओं के तम्बू अब उखड़ने शुरू हो गए है।

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