धर्म सेवा डोर टू डोर लेन टू लेन


©Amar Sneh

साईकल का धर्म रथ, जिसपर झण्ड़ा बोर्ड स्पीकर आदि लगा है, पण्डि़त जी गली के नुक्कड़ पर साईकिल रथ रोकते है और लाऊडस्पीकर पर आवाज लगा रहे है ‘‘पूजा करवा लो पाप घटा लो, पूजा की निराली विधियां नई सिद्धियाँ, इलेक्शन हो या लॉटरी, जेल हो गई हो या कत्ल का मामला, सट्टा हो या इज्जत में लगा गया हो बट्टा, भगाई हो या भगानी, इश्क हो या कोई और मर्ज, घपले में फंसा हो या करना हो घपला, एंग्जाम हो या कंपिटीसन, नौकरी का सवाल हो या नौकरी में बबाल, दुश्मनी हो या जर-जोरू और जमीन का टंटा-अड़ंगा-फसाद। मशान, जोगनी, भूतनी, भूत, नारसिंह, भरैव और देवी देवता का साया हो या चुड़ैल की छाया। हर काम में कम दाम में मनोरथ पूरी करवा लो। धर्म के नाम पे काले धन को सफेद करवा लो, काले कारनामों पे पर्दा डलवा लो, आश्रमिया रेपों से खुद को बचा लो, पूजा करवा लो,आईए-आईए घर से बाहर आईए, लाभ उठाईए, देव भूमि भारत में इस स्पेशल धर्म सेवा का लाभ उठाईए, जीवन और देश को सुखी बनाईए, धर्म सेवा इन दा लेन एन्ड एट दा ड़ोर का लाभ उठाईए। कलयुग के वर्तमान बिन्दु पर ऑनली बाबा ऑनलियम की शरण में आ जाईए।“

धर्म सेवा डोर टू डोर लेन टू लेन - अमर स्नेहपण्डि़त जी अपना धर्म रथ आगे खिसकाते उद्घोषणा के साथ कॉलानी में शंटिंग कर रहे है। कुछ देर बाद लोग साईकल रथ के आस-पास इकट्ठा हो गए। एक व्यक्ति प्रशंसा में कहने लगा ‘ड़ोर टू ड़ोर सेवा करने की योजना आपने बहुत अच्छी बनाई है पण्डि़तजी। पण्डि़तजी ने गौरवान्वित होकर रथ स्टेंड़ पर लगा दिया, ’‘देखिए समय को देखते हुए यह कल्याणकारी योजना, सोचिए कितनी तर्क-संगत है। आप दूर-दूर यात्राए करके पैसा खर्च करके धर्मस्थलों पे जाते है लेकिन कभी बम विस्फोट, कभी प्रकृतिक आपदा, कभी भारी भीड़ में स्टेम्पॅड, कभी जहरीला परसाद, कभी फसाद, मतलब ये कि वहां से लौट कर आएगे भी या नहीं इसकी कोई गारन्टी नहीं है। अभी हाल ही में दुर्गम पहाड़ी पर बने मंदिरों में हजारों भक्तों की जान चली गई इससे पहले भगवान की रस्सी को छूने के लिए गए भक्त भारी भीड़ में प्राण खो बैठे। कभी कुंभ में हादसा हो जाता है तो कभी अर्ध कुंभ में, हजारों लोग प्राण खो बैठते है। इसके लिए अदृश्य बाबा केवलम, यानी अन्सीन बाबा ओनलियम ने अपनी हिमालय की अदृश्य काली गुफा से स्वप्न में हमें आदेशित किया है कि हम घर-घर जा कर बाबा नाम केवलम, जो सभी देवी-देवताओं का ऑल इन वन है। उनका नाम ले कर और उनके द्वारा आदेशित पूजा करे तो भक्तों की हर समस्या का निदान हो जाएगा। यही चमत्कार को साधने में बाबा नाम केवलम ने हमें स्वप्न में ही सिद्धि दी है। उन्होने ये भी कहा कि केवल तुम्हें ही ये सिद्धि दी जा रही है क्योंकि तुम्हारे परम्परागत भक्त पूर्वजों की साधना का प्रतिफल देना बाकी था। तुम्हारे लकड़ दादा पण्डि़त चतुरराम की भक्ति से प्रसन्न हो कर बह्म, विष्णु, महेश तीनों बहरूप धर कर भक्त जी के यहां पधारे थे। वो दर्शन पा कर इतने प्रसन्न हुए कि खुशी से उनकी हृदय गति रूक गई और वो दर्शनों के फल भोगने से वंचित रहे गए थे, उसी का बकाया फल तुम्हें उनके वंशज होने के नाते दिया जा रहा है। उन्होंने कुछ गुर प्रदान किए है। बस अदृय बाबा नाम केवलम के आर्शिवाद से अब हम जन कल्याण के लिए ड़ोर टू ड़ोर धर्म सेवा में समर्पित है। – एक व्यक्ति ने मुंह बनाते हुए कहा, ’’ये सब आप कह रहे है हम कैसे मान ले ?’’

-आप वैसे ही मान ले जैसे पोथों में लिखा हुआ, संशोधित किया हुआ और समय-समय पर इच्छा अनुसार जोड़ा हुआ सदियों से मानते आ रहे है वैसे ही मान लिजिए भक्त श्रेष्ठ।

-प्रश्न कर्ता जिज्ञासु ने व्यंग्य परिहास किया तो पण्डि़त जी से बरदाश्त न हुआ। वो तनिक भौंहे चढ़ा कर उनसे पूंछने लगे, ‘कही तुम टी.वी. चैनल वाले तो नहीं हो? जो हर रोज जब देखो तब जहालत प्रसार कर रहे है देश में, हर रोज भविष्य बताते है और एक चैनल से दूसरे चैनल की भविष्यवाणी कभी एक नही होती अलग-अलग होती है। अरे मूर्खो नग रत्नों की कल्पित विशेषताए बता कर खूब ठग रहे है ये लोग, जनता को बेच रहे है खुदाई माल। आज तक किसी को नगो के पहनने से कोई चमत्कार हुआ हो तो बता दे हम उसके पैरों के नीचे से निकल जाएगे। यही नहीं गपोड़पंथीं बताते है कि शंकर भगवान के रोने से जहां-जहां उनके आंसू गिरे वहां-वहां पर रूद्राक्ष के पेड़ पैदा हो गए, बहुत रोये भगवान टनों बिकावा रहे है ये चैनल वाले। कहते है एक मुखी पहनने से ये होता है और दो मूखी पहनने से वो होता है और पांच मुखी पहनने से जो नहीं होता वो होता है। लंतरानियां हांकते रहते है ये पोंगा पण्डि़त। अगर ऐसा ही है तो दे दो एक-एक रूद्राक्ष सारे भारत में लोगों को बांट दो सब सुखी हो जाऐगे, हर समस्या हल हो जाएगी। पूरा भारत तबाह हो चुका है इन गपोड़पथीयों की बजह से। अरे मैं पूछता हूं ज्योतिषचार्यो से कि बम व्लास्ट होने से पहले ही क्यो नहीं बता देते बेचारी बेबस सरकार को, क्यो नहीं पकड़वाते अपराधियों को? धन्धेवाज झूठो के सरताज। लगता है मीडि़यां प्रोग्राम बनाने के मामले में दिवालिया हो गया है। अरे कोई ऐसा प्रोग्राम क्यों नहीं बनाते जिसका बौद्धिक स्तर पर प्रभाव हो। अब ये गपोड़पंथ का प्रसार करके मीडि़यां की ऐसी-तैसी कर रहे है। पण्डि़तो को सड़क पर ला दिया है इन्होंने। ऐसे में हम इन माध्यम वालों की जहालत सेवा को मुंह तोड़ जबाब देगें। और जनता को जागरूक करेगे कि अपने घर बैठ कर हमारे बताए हुए बाबा नाम केवलम का केवल पांच मिनट ध्यान करें। ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखे लेकिन इस जहालत से बचें, ढ़ोगियों से बचे और माध्यम से धार्मिक मीडि़या कार्यक्रमो के दिवालिएपन से अपनी रक्षा करे। हम डोर टू डोर सेवा अदृश्य हिमालय की काली गुफा के अदृश्य बाबा का सन्देश ले कर घर-घर जाएगे। आप अपने घर में केवल पांच मिनट में अदृश्य शक्ति का चमत्कार देखिए। आपको शान्ति मिलेगी और आपकी समस्याओं का निदान होगा। जय बाबा नाम ओनलियम।

भीड़ से कुछ लोग महाराज के पैर छूने लगे और आग्रह किया कि “प्रभु आप हमारे घर में पधारे! हमारे घर पधारे।“

धर्म रथ अब एक घर के पास लगा दिखाई दे रहा है और फेरी वाला पण्डि़त अंदर क्या कर रहा है ये तो वही बता सकते है जिनके यहां इस वक्त पण्डितजी इस नए शोशे के साथ विराजमान है।

(रचना नव भारत टाइम्स, देनिक ट्रीब्युन, आउट लुक और शिवम में प्रकाशित)

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