नयी पार्टी


 © Amar Sneh

धर्म-धुरन्दर-ज्योतिषाचार्य घमंडानन्द जी महाराज ने रूढि़ विश्व एवं ढकोसला मंच नामक राजनितिक पार्टी का गठन करके जन सभा में भाषण देने के बाद प्रेस एवं जिज्ञासुओं को संबोधित किया। प्रेस दीर्घा से समाचार पत्र, पत्रिकाओं के प्रतिनिधियों ने उनसे पूछा, ‘‘ घमन्डानन्द महाराज जी अभी आपने अपनी पार्टी के माध्यम से देश में राम राज्य की स्थापना के लिए अपने मेनीफेस्टो से ज्यादा राम कथा सुना कर काफी शोर-गुल मचाया – कृपया प्रकाश डालें कि राम राज्य में तो कोई राजा ही होगा – लेकिन हमारे देश में तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था है। एैसी व्यवस्था में राजा की कल्पना क्या असंगत नहीं लगती ?’’

 147      घमन्डानन्द महाराज ने कुटिल  मुस्कान  बखेरते  हुए  उत्तर दिया, ‘‘देखिए देश की वर्तमान व्यवस्था में राजनितिज्ञ, पूंजीपती और संपूर्ण सरकारी तंत्र अपने स्थान पर राजा ही है, वो आम आदमी या आदमी है ही नहीं, और उसमें आदमी बने रहने की गुंजाइश भी नहीं है – फिर वैसे भी तो देश और व्यवस्था राम भरोसे ही चल रही है।’’

-जब एैसा ही है तो फिर राम राज्य कायम करने वाली पार्टी की आवश्यकता क्या है आपको तो इसी में संतोष कर लेना चाहिए। खैर ये बताइए कि राम राज्य की परिकल्पना क्या है -उस राम राज्य में किस प्रकार की व्यवस्था होगी। वो पार्टी किसी शैली में राज-काज चलाएगी, इसकी कोई तस्वीर, कोई प्रारूप, तो होगा आपके पास?

-सारी व्यवस्थाएं  ईश्वर लिखित पोथा अनुरूप ही होंगी।

-जैसे ?

-जैसे क्या ईश्वर आदेशित पोता स्वरुप पूर्व जन्मों के लेखा जोखा के अनुसार मानवीय  कल्याण व्यवस्था यानी वर्ण व्यवस्था तथा सास्त्रो (शास्त्रों) में लिखी वर्णित पाषण रेखाओं का भाग्यवाद जिसके अनुरूप जो कुछ भी हो रहा है बस वो ही वैसे ही है जैसा इस देश के भाग्य में लिखा था। यानी घोटाला धोखा धड़ी, रेप-टेप, बेईमानी, मिलावट जालसाजी, दुराचार, शोषण, भूख मरी गरीबी यानि.. यानी जो कुछ भी होता है भाग्य अनुरूप होता है इस में विवाद की, संविधान की, न्यायलय, क़ानून आदि आदि की गुंजाईश ही नहीं है। जो कुछ भी है हमारे धर्म के अनुसार विधि का विधान सर्वोपरि है…

-यानि किसी चीज की कोई गुंजाईश ही नहीं है?

-हमारे ऋषि मुनियों ने दूरदर्शिता के तहत यहाँ प्राचीनत अपरिवर्तनीय धर्म विधान को ईश्वरीय विधान को लागू किया । जो इस विधान को ईश्वर के आदेश को हमारे धर्म के अनुसार नहीं चलेगा या चलाएगा उसे इस देश से निकल दिया जायेगा। उसकी सुविधा के लिए श्री नगर मुज़फराबाद की बस सर्विस का भरपूर उपयोग किया जायेगा।

-वैसे आप देश की पार्लियामेन्ट में क्या करेगें

       महाराज ने फिर वही  कुटिल  मुस्कान धारण किए-किए उत्तर दिया, ‘‘ देखिए आज जो कुछ भी पार्लिमेन्ट और विधान सभाओं मे होता है उसे आपकी प्रेस कभी-कभी राष्ट्रीय धर्म बताती है, गुलगपाड़ा, लड़ाई झगड़े, मार पीट अपशब्दों की बोछार, वाक आउट, वाक इन, स्थगन और कभी-कभी तो सभापति जी ही वाक आउट कर जातें है। ऐसे में पश्चाताप स्वरूप हम पार्लियामेन्ट मे पाँच वर्ष राम नाम का कीर्तन करेंगे।

       प्रेस दीर्घा से फिर किसी ने पूछा, ‘‘ घमन्डानन्द जी लेकिन  हमारा देश तो सेक्यूलर है एैसे में……….।’’

– देखिए अभी हम संविधान में लिखे सेक्यूलर शब्द का हिन्दी या देशी-स्वदेशी अर्थ क्या होगा वो खोज रहे है। वैसे इस सेक्यूलर देश में नगर पालिका से लेकर पार्लियामेन्ट तक के चुनाव धर्म और जाति के आधार पर ही लड़े जाते है एैसा है। विविधता हमारी पहचान है और एकता हमारा राष्ट्रीय नारा है।

– महाराज, आपने बताया नहीं कि राम-राज्य किस तरह की सरकार चलाएगा – या वो सरकार कैसी होगी?

– फिर वही बात.. ऐसा है हम ईस्वर (ईश्वर) आदेस (आदेश) से ऋषी मुनियों द्वारा रचित सास्त्रों (शास्त्रों) के अनुशार (अनुसार) ही राज्य चलाएंगे।

– महाराज आपके शास्त्र तो राज चलाने वालों के लिए दो ही बातें बताते हैं एक तो धर्म की रक्षा और दूसरा गौ और ब्राह्मण के लालन-पालन का दायित्व । एैसे मे बाकी जनता और जीवों का क्या होगा? धर्मो का क्या होगा ?

       घमन्डानन्द जी कुछ सोच में पड़ गए और गंभीर मुद्रा धारण कर बोले, ‘‘उनकी अशान्ति को सान्त (शांत) करने के लिए हमारी एक मिनिस्ट्री विश्व सान्ति यज्ञ हर पूरनमासी को आयोजित करती रहेगी। इसके अतिरिक्त हमारी होम मिनिस्ट्री स्पेशल टाश्क (टास्क) फोर्स गठित करेगी जो बिल्लियों पर नजर रखेगी कि वो रास्ता ना काट जाएँ। हम आम जनता को राशन कार्ड की जगह चैघडि़या कार्ड ईसू (ईशू) करेंगे ताकी वो अपने सारे काम चैघडि़या देखकर ही करें और उसी दिन यात्रा करें जिस दिन हमारा विधान, नियम कहता है।

-यानि बाकी दिनों मे ट्रेन-बस सेवा यातायात सब बन्द रखा जाएगा………?

-बिलकुल ! हमारे ऋषियों द्वारा बनाए नियमों की दूरदर्शिता को देखिए, उन्होने जो विधी-विधान, नियम बनाए उससे ग्लोबल वार्मिगं की समस्या का समाधान अपने आप हो जाएगा साथ ही हर रोज होने वाली दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकेगा।

       बहुत देर से खामोश बैठे एक पत्रकार ने महाराज घमन्डानन्द जी का ध्यान आकर्षित करते हुए प्रश्न पूछा, ‘‘ महाराज आपने अभी बताया कि आप यदि इलेक्शन जीत जाते हैं तो आपकी पार्टी पार्लियामेन्ट में पाँच वर्ष कीर्तन करेगी – लेकिन इस बीच यदि देश पर आक्रमण हो जाए तब क्या होगा ?’’ महाराज प्रत्युत्तर में ठहाका मार कर हँसे और बोले, ‘‘छोटी सी बात है हमारा ज्योतिष एवं तांत्रिक-यांत्रिक-मांत्रिक मंत्रालय शुरू में ही सीमाओं को अभिमंत्रित कीलक से कील देगा और फिर भी किसी ने चढ़ाई करने का दुस्साहस किया तो मंत्रालय मूठ भेजेगा, मारक यंत्र-तंत्र-मंत्र शक्ति का उपयोग करेगा। हमारे पास विद्याओं की कमी नहीं है, ये सास्त्र (शास्त्र) नही तो वो सास्त्र, सास्त्रों का अंबार है हमारे पास। सिद्धियों की शक्ति दुश्मन को तहस-नहस करने के लिए उपयोग की जाएगी, भक्ति की शक्ति उपयोग की जाएगी। इससे भी काम न चला तो दुश्मन को श्राप देकर पत्थर बना दिया जाएगा। हमारे पास विद्याओं और शक्तियों का कोई ठिकाना है क्या !

-महाराज उसके लिए तो बली भी देनी होगी ?

-हाँ, पिछले साठ बासठ वर्षो से इस निजाम को कायम रखने के लिए तो आम आदमी की बली दी जा रही है वही धर्म शासन कायम रखने के लिए उपयोग कर ली जाएगी।

-महाराज आपको इस प्रकार की पार्टी बनाने की प्रेरणा कहाँ से मिली ?

-आप बुद्धीजीवियों से, भारतीय मीडिया से, जो पत्र-पत्रिकाओं और टी.वी. चेनलों पर गलित-गलात, जीर्ण-क्षीर्ण, परम्पराओं, रूढि़यों, ज्योतिष आदि को प्रकाशित करके और चैबीसो घन्टे टी.वी. पे प्रसारित करके अपना दायित्व निभा रहा है। पत्र-पत्रिकाओं में आरतियाँ छप रहीं है। टी.वी. पे दिमागी दिवालिए पन से उत्पन्न कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई है। साहित्य, कला और विचारों को आंदोलित करने वाली विद्याओं के लिए स्थान हाशियों पर ही रह गया है। मीडिया बुद्धिजीवियों की यह अपनी पार्टी होगी जो उनके मानसिक साँचें के अनुरूप कार्य करेगी। मुझे आशा है मीडिया के बुद्धिजीवियों एवं प्राचीनतम भारतीय गलीत-गलात, जीर्ण-शीर्ण सभ्यता के अनुयायियों के सारे वोट अबकी दो हज़ार चौदह पार्लियामेन्ट के इलेक्शन में रूढि़-विश्व, ढकोसला पार्टी को ही मिलेगें।

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