महा देशभक्त


न्यायलय में एक एम.पी. पर व्यंग्य – मुकदमा चल रहा है वादी एवं अभियुक्त पक्ष के वकील मौजूद हैं। वादी पक्ष का वकील अभियुक्त को क्रॉस कर रहा है।

वादी पक्ष का वकीलः- मैं माननीय कोर्ट से दरख्वास्त करूंगा कि मुझे अभिुक्त देशभक्त एम.पी. से प्रश्न पूछने की इजाजत दी जाय..

अभियुक्त पक्ष का वकील:- आव्जेशन योर आनर – मेरे मुव्किल महादेशभक्त है उन्हें केवल देशभक्त कह कर उनका कद छोटा करने की कोशिश की जा रही है। मेरे मुव्किल का नाम देशभक्त पहले से ही है और एम.पी. बनने के बाद वो वैसे ही देशभक्त हो गए यानि डबल देशभक्त हो गए

वा. व.:-    मैं क्षमा मांगता हूँ अतः मैं भूल सुधारने के बाद महादेश भक्त जी से जानना चाहता हूँ कि उन्होंने अब तक कितने मर्डर करवाए, कितनी भोली-भाली लड़कियों की इज्जत लूटी, कितने बलात्कार किए, कितने एक्सटोर्शन किए, कितनी जमीने हड़पी, कितने घपलों में वो शामिल है, अपना दबदबा कायम रखने के लिए कितनी झोपडि़यों में आग लगवाई, कितने एनकाउंटर करवाए

maha deshbhktअ. व.:-  आब्जेक्शन योर आनर मेरे लर्नेड वकील एक साथ इतने सारे प्रश्न पूछ कर मेरे माननीय मुव्किल को भयभीत कर रहे हैं और उनकी स्मरण शक्ति की बेवजह परीक्षा ले रहे है जबकि उन्हें यह भली – भांति मालूम होगा कि राजनीतिज्ञो की स्मरण शक्ति क्षीण होती है, इसीलिए वो जनता से जो वायदे करके आते है उनमें से एक भी स्मरण शक्ति क्षीण होने के कारण कभी पूरे नहीं होते। वैसे भी कोई इतने सारे मर्डर, बलात्कार, घपले कैसे याद रख सकता है।- मैं अपने विद्वान वकील महोदय को बता दूँ कि एम.पी. बनने के तुरंत बाद वो सारे केस जो पहले के थे रफा – दफा हो गए है उनका नामो निशान फाइले कुछ भी अवेलेवल नहीं है और अभी के सिर्फ एक मुकदमे को छोड़ के कोई मुकदमा दर्ज ही नहीं हुआ है। होगा तो कानून को कानूनी तौर तरीके से देख लिया जाएगा। मैं अपने विद्वान साथी से कहूँगा कि वो सिर्फ वर्तमान केस के सबंध में ही बात करें और वही प्रश्न पूछे जिसका इस केस से ताआल्लुक हो –

व.व.:-   मेरे प्रश्नों का इस केस से भी ताआल्लुक हैं। इससे अभियुक्त के व्यक्तित्व का खुलासा होगा कि महादेशभक्त महा खतरनाक हैं। जिन्हे अपराध किए वगैर खाना ही हज़म नही होता।

न्यायधीशः- प्रश्न पूछने की प्रक्रिया जारी रखी जाय…………

व.व.:-   मैं अभियुक्त महादेशभक्त से पूछे गए प्रश्नों का उतर चाहता हुँ।

अभियुक्त:- मैं जीवन में एम.पी. बनना चाहता था और उसके लिए जिस अनुभव की जरूरत थी उसे मैंने हासिल किया और एम.पी. बनकर जो कुछ किया जाता है उसमें मेरा पुराना अनुभव काम आया और  मैं देश की सेवा जनता की सेवा उसी कुशलता के साथ कर रहा हूँ । आंकड़ो की बाते मुझें याद नहीं रहती – मैं पूर्णरूप से महा देशभक्त हूँ नाम से भी और अपने महान कर्मो से भी, जिसे वर्तमान प्रजातंत्र पूरी तरह से स्वीकार करता है अंगीकार करता है। – न्यायधीश महोदय– मुझे फंसाने के लिए ये विपक्ष की चाल है ये विपक्ष की चाल है। जयहिन्द। जय कोटली

वा.व.:- ये जयहिन्द ! महा देशभक्त साहब ये आपकी ये पब्लिक मीटिगं नही है-

अ.व.:- आब्जेक्शन योर आनर। मेरे माननीय मुव्किल का ये तकिया कलाम है। इस पर एतराज करना अनुचित है शायद मेरे विद्वान साथी ये नहीं जानते कि राजनिति में ऐसे शब्द भण्डार और सेन्टेस स्टोर बिना प्रयास के स्वतः ही उच्चारित होते रहते है -मैं ये बता दूँ कि राजनितिज्ञ यानि देशभक्त में जनता के वोट से प्यार होने की वजह से देश की गरीबी हटाने, देश में शांति और व्यवस्था बरकरार रखने, सबको सभी सुविधाए दिलवानें एवं देश को महा शक्ति बनाने के ये सारे स्टेन्स उनके मुहँ से स्वतः ही बिना प्रयास के निकल पडते है। ये तो इस वक्त केवल जयहिन्द ही कर रहे है।

वा.व.:- खैर मान लिया-हाँ तो आप बताएँ- मैं माननीय मित्र की सिफारिश से थोड़े – थोडे प्रश्न पूछूँगा – हाँ तो बताएं एम.पी. बनने से पूर्व आपने कितने कत्ल किए, कितने बलात्कार किए, कितने लोगों को अगवा किया या करवाया। धोखा धड़ी आदी की कितनी वरदाते की…….

अपराधी:- हमने जो कुछ भी किया देश के हित में किया गरीबी को हटाने के लिए किया आम आदमी की सुख सुविधा के लिए किया। जयहिन्द!

वा.व.: जनाव यह पब्लिक मीटिगं नहीं है कोर्ट है। मैने आप से पूछा कि आपने एम.पी. बनने के बाद कौन-कौन से अपराध और अपराधिक कारनामे किए।

अ.व.:- योर आनर असंबध प्रश्न पूछ कर अदालत का कीमती समय बर्बाद किया जा रहा है – मैं माननीय न्यायलय को पुनः यह बताना जरूरी समझता हूँ कि मेरे माननीय मुव्किल एम.पी. है और इनमें जो गुणवता है क्या उसके बगैर कोई एम.पी. हो सकता है और अगर दो – चार प्रतिशत बिना इस गुणवता के हो गए होगें तो उसे अपवाद समझ कर जिक्र के काबिल नही समझना चाहिए। और उसे मूल्यांकन का आधार नही बनाना चाहिए।

न्यायधीश:- कोर्ट आपकी बात से सहमत है – हाँ (वादी पक्ष के वकील से) यदि और कोई प्रश्न पूछना चाहते है तो पूछिए

वा.व.:- धन्यवाद! मुझे मुद्दे से जुड़े बहुत से प्रश्न पूछने है – हाँ तो याद कीजिए दो फरवरी सन् 2008 रात 11 बजें आपने लड़की ’अ’ को फलाने होटल के कमरा नः 400 में पार्टी होने के बाद क्यों बुलाया था – मैं आपको याद दिलाने के लिए बता रहा हूँ ये वो दिन था- जिस दिन आपने जमीनों के आवटंन के मामले में भारी रिश्वत ली थी – यही वो दिन था जिस दिन आपने अपने क्षेत्र की सड़को के निर्माण के लिए ठेकेदारों से एक मुश्त भारी रकम ली थी। यही था वो दिन जब आपने चार इन्जीनियरो और दस डाक्टरों की नियुक्ति के लिए व्राइब ली थी- सोचिए याद आ जाएगा…… नहीं याद आ रहा है………… हाँ यही वो दिन था जिसके दूसरे ही दिन आपने पी.एम. से कह कर दो बड़े पुलिस अधिकारियों के तबादले करवाए थे। – शायद आपकों याद आ गया होगा – नहीं आया – यही वो दिन था जिसकी रात आपने ’अ’ लड़की को होटल के बुक कमरे में बुलाया था। उसके बाद आपने  उसके साथ बलात्कार किया- जब वो गुस्से में चीखी चिल्लाई तो आपने उसी के सामने फलाने – फलाने को फोन करके उसे जान से मरवा डालने की सुपारी दी-

अ. व.:- आब्जेक्शन योर आनर – बताइए जो इतना बड़ा महादेश- भक्त है, जो खुद बड़ो-बड़ो को रास्ते से हटाने के लिए खुद नारीयल लेता हो वो किसी को सुपारी-वुपारी क्यों देगा। यह बात बिलकुल भी तर्क संगत नही है, बेबुनियाद है- ये जरूर किसी अपोजीशन पार्टी की मनघडंत कहानी है, षड़यन्त्र है महादेशभक्त को फसाने के लिए………….

वा. व.- योर आनर मेरी बात अभी पूरी नही हुई…………

न्यायंधीश:- जारी रखिए

वा.व.:- फिर आपने उस ’अ’ नाम की लड़की को समझाया की अगर वो गर्भवती हो गई तो आप उससे शादी कर लेगें वो इस बात की पुलिस में रिर्पोट न करे।

अ.व.:- योर आनर बताइए अगर ये हुआ भी है जो कि नही हुआ फिर भी ये कितनी ईमानदार एप्रोच है, इसकी सराहना की जानी चाहिए

वा.व.:- बिलकुल ठीक है – लेकिन ये महाशय पहले से ही शादी -शुदा है।-हाँ मैं अपना प्रश्न जारी रखता हूँ । – क्या ये वही ’अ’ नाम की लड़की है जिसे एक फरवरी 2008 को आपने आफिस में बुलाया था। – फिर आप उसे अपनी पब्लिक मीटिंग मे भी ले गए थे जहाँ आपने अपने भाषण में कहा था कि आपके पास बड़े से बडा हथियार है- बड़े से बड़ा सरकारी गुंड़ा है सर्टीफाइड गुन्डा……… आपके पास वो ताकत है जिससे आप कुछ भी कर सकते है।

अपराधी:- हाँ और नही हमारे मुहँ से निकली हर बात हर बात हर……..

अ. व.:- माननीय कोर्ट से क्षमा मांगते हुए मैं निवेदन करूँगा कि मेरे मुव्किल देश के लिए गहरी चिता में रहते है सुबह से शाम तक वक्तव्य देने पड़ते हैं यादाशत के विषय में राजनितिज्ञो की मानसिक स्थिति और पापुलर प्रक्टिस और भारतीय राजनितिज्ञ के गुणों के कारण हर बात याद रखना सम्भव नही है।

वा. व.:- मैं माननीय कोर्ट से देश के महान नेता महा देशभक्त जिन्होंने देश को लुटाने के लिए मुक्त ह्रदय से सरकार की नहर योजना, पूल योजना, सड़क योजना, रेल योजना, सिंचाई योजना, खदान योजना, इन सब की पूरी लिस्ट जो की माननीय कोर्ट को दी जा चुकी है इन अनगिनत योजनाओं के टेंडर-परमिट इन्होने केवल अपने परिवार के सदस्यों अपने मित्रों और चाहने वालों को जोड़ तोड़ कर के दिलवाए है।

अ.व.:- आब्जेक्शन योर ओनर
न्यायधीश:- आब्जेक्शन ग्रांटेड, बोलिए
अ.व.:- माननीय कोर्ट ये विद्धवान वकील हमारी महान संस्कृति का अपमान कर रहे है,  सहोदर भाव और अतिथि आदि के लिए हमारी संस्कृति सहोदर अतिथि देव भव कहती है, हम अपने चाहने वालों के लिए जिंदगी तक कुर्बान कर देते है, ये टेंडर-फेंडर, परमिट-सरमिट तो तुच्छ चीजे है, इसलिए माननीय कोर्ट से दरख्वास्त है कि हमारी महान संस्कृति का अपमान सुनते वक्त माननीय कोर्ट अपने कान में उंगली डाल कर इनकी बातों के लिए खाना पूर्ति कर दे
वा.व.:- आई ऑब्जेक्ट योर ऑनर
न्यायधीश:- ओब्जेक्शन ग्रांटेड
वा.व.:- माननीय कोर्ट से मेरी अपील है कि मेरी दलील सुनते समय वह अपने कान में उंगली ना डाले, माननीय कोर्ट का ध्यान इन असंख्य घपलों, अपराधों पर कार्यवाही, सुनवाई, कमिशनाई में तो कम से कम 500वर्ष लग जायेंगे, इसलिए माननीय कोर्ट से प्रार्थना है कि वो इस बात को ध्यान में रख कर कि ये महा देशभक्त अपराधी है इनके अपराध सामने दिखाई दे रहे है उसी अनुसार बिना पुलिस की गवाही और गवाहों के बिना माननीय कोर्ट इस पर अपना निर्णय लें, क्योकि हर केस में पुलिस और गवाहों को ये महा देशभक्त लोग अपने रसूख, ताकत और पैसे की ताकत से तोड़ डालते है, पुलिस के पास हमेशा अपराधों को साबित करने के लिए सबूत हि नहीं होते है
अ.व.:- आई ऑब्जेक्ट योर ऑनर
न्यायधीश:- ओब्जेक्शन ग्रांटेड
अ.व.:- मैं माननीय वकील से पूछना चाहता हूँ और बताना चाहता हूँ कि मेरे माननीय मुव्किल की सरकार रहते हुए सदा भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन होता रहा है क्या ये हमारी नीतियों का न्यायपूर्ण नितीकरण नहीं है कि हमने पैसे और रुपये की ताकत को हमेशा कम किया है, जिसके लिए हमारे माननीय वकील कह रहे है कि हम पैसे की ताकत पर पुलिस और गवाहों को तोड़ देते है
वा.व.:-योर ऑनर, मुझे कहने की इजाज़त दी जाए
न्यायधीश:- ओब्जेक्शन डिसमिस्ड
अ.व.:- थैंक्स योर ऑनर, योर ऑनर मेरे मुव्किल पर अनगिनत अपराध आरोपित है और विद्धवान दोस्त का कहना भी है कि इस तरह इन केसों में कम से कम 500 वर्ष लग जायेंगे, तो मैं माननीय कोर्ट से दरख्वास्त करूँगा कि मेरे माननीय मुव्किल हिंदू है और हिंदू धर्म में अनेकानेक अपराधों और पापों के लिए श्री गंगा जी में दुबकी लगाने के बाद सारे के सारे पाप अपराध स्वयं ही क्षमा हो जाते है और मोक्ष की प्राप्ति प्राप्त होती है, मेरे माननीय मुव्किल महा देशभक्त विलक्षण राजनीति प्रतिभा के धनी आज ही वाराणसी के पावन गंगा तट पर पहुँच के श्री गंगा जी में डुबकी लगाने के लिए तैयार है
न्यायधीश:- नो.. नो.. नो.. अभी तक हमारे संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, फिर भी, हाँ आप कुछ कहना कहते है? क्या आप इस धार्मिक व्यवस्था से सहमत है?

वा. व.:- नो सर..
न्यायधीश:- (अपराधी से) क्या आप पर लगे आरोपों  से आपसहमत है (अपराधी सर हिला कर हाँ का संकेत देता हैफिर नहीं का संकेत देता है वो पूरी तरह से भ्रमित है)
वा. व.:- माननीय कोर्ट से प्रार्थना है कि इसे नोट किया जाए। देट्स आल सर।

न्यायधीश:- (अभियुक्त से) आप कुछ कहना चाहते है

अपराधी:- जी! हमसे बार-बार आंकड़ा माँगा जा रहा है हम आंकडा चाहे जेल में हो चाहे कही भी जब सरकार गिरती है या बिल पास करना होता है तो देश के लिए कोरम पूरा करने के लिए हम कीमती सेवा के लिए हाजिर हो जाते है। हम माननीय कोर्ट को बताना चाहते है कि मेरे अनुभव और योग्यता को देखकर ही जनता ने मुझे चुन कर भेजा है- अगर मुझ पर कोई अपराध आरोपित होता है तो जनता ही उसकी जिम्मेदार है उसी को सजा मिलनी चाहिए।

न्यायधीश:- कोर्ट इज एड्जोर्न्ड फार द डे अगली तारीख में जनता को पेश किया जाय।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s