इश्क ना होता तो शहर का क्या होता


दिल की धड़कन बंद होने से पहलेएक बुजुर्ग आशिक एक शेर लिख गए – 

दिले  नादां ने  ताउम्र  सोने  न दिया।

शिकायत की हमने तो बुरा मान लिया।। 

नाराज दिल ने खुद घुट कर उनकी जान ले ली लेकिन उनके कूँचकर जाने के बाद भी मोहब्बत का सिलसिला न खत्म होना था न हुआ। जब तक इंसान के सीने में दिल है मोहब्बत का जज़्बा कायम रहेगा और ये बात भी अपनी जगह पत्थर की लकीर है कि इश्क करने वालों को न कभी चैन मिला है न मिलेगा। एक जले-भुने आशिक के दिल से निकले इस लज़ीज़ शेर का मुलाहिज़ा फरमाएं-

कबाबे  सींख  है हम  हर तरफ  पहलू बदलते हैं।

जो जल जाता है ये पहलू तो वो पहलू बदलते हैं।।

    जनाब इसी तरह पहलू बदलते-बदलते उम्र गुज़र जाती हैं लेकिन यहां तो  इस हादसा ए मोहब्बत में दो बरस में ही सब्रो करार टूट गया। इश्क की दीवानगी का ये ताजा तरीन हैदराबादी हादसा अभी हाल ही पेश आया। सुबह का वक्त था लोग अभी बिस्तरों में ही थेकि शहर की सबसे ऊँची जगह से ‘‘ फरमाने-लैला ’’ लोगों के कानों में पड़ा तो लोग बाहर निकल आए। एक नारी की क्षत्राणी तेवर में वाणी सुनाई दी। वहां नीचे क्या देख रहे हो ऊपर देखो। लोगों ने वाटर वक्र्स की ऊँची टँकी पर एक सजी-सँवरी नारी को बरामद किया- ‘‘ अरे क्या आसमान से उतरी हो! ’’ – ‘‘ मुझे लगता है शायद ये भारतीय नेतानी हैं सुबह की ताज़ी बेला में राष्ट्र के नाम संदेश जारी करना चाहती है!! ’’ – शायद फजाए इलैकशन के इस दौर में पब्लिक मीटिंग करना चाहती है!!!

    तभी ऊपर से आवाज़ आई ‘‘ ओ चैन की नींद सोने वालो जागोमैं पूरी दुनिया के सामने आज अपना फैसला करके ही रहूंगी………।’’

ishk na hota    सैर को निकले लोग भी वहां जमा होने लगे। सभी की नजरें टंकी पे खड़ी सजी-संवरी नारी पर केन्द्रित हो र्गइं। ऊपर से उसने ऐलान ऐ लैला बुलंद कियामैं……….यही से छलांग लगाऊंगी। ’’ नीचे से प्रतिक्रिया हुईमोहतरमा आप अपना ये करिश्मा ओलम्पिक खेलों के लिए सुरक्षित रखें।’’ …..मोहतरमा-ए ख़ास ने जवाब दियाये इश्क मोहब्बत का खेल भी किसी ओलम्पिक से कम नहीं है, मैं यहीं से  छलांग  लगाके राहे मोहब्बत में शहीद हो जाऊंगी अगर उसने मुझसे शादी न की तो …..।’’

-ये सुनते ही लोगों में हलचल मच गई,इस दिलचस्प आसमानी मसले पर जब नजर साधे-साधे लोगों की गर्दनें दुखने लगींतो उनमें से कुछ टैंक के नीचे लगी घास पर लेटकर नजारा देखने लगे,एैलाने लैला बराबर जारी है। पहले उसने अपने इश्क का पर्दाफाश कियाफिर आशिक की तफसील दी तो लोग दंग रह गए। कुछ ने नारी विशेष को पहचान लिया,“ये तो उनकी कॉलोनी के फलाने मकान की है फलानी……..दो बच्चों की माँ है।’’

– हाँ हाँ मैं वही हूँ और फलाने कॉलोनी के नौजवान से प्यार करती हूँ उसे भी मेरे प्यार में पागल हुए दो साल गुज़र गए है। इस बीच हम प्यार में सैंकड़ो बार छत्तीस भी हो चुके हैं…… क्या इतने इन्टीमेट रिलेशन होने के बाद भी वो बच जाएगा……….

    प्यार की सुनहरी घडि़यों का जिक्र करते-करते उसमें नारी शक्ति का संचार होने लगा जो मर्द की मर्दानगी से अंदाजन दस हजार हार्स पावर से भी ज्यादा परिलक्षित हो रहा था। कुछ मोअजिज लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसका कोई नतीजा न निकला। कहते हैं-

    प्रीत तो ऐसी होय हैजैसे कच्चा सूत।

    सुलझावें तो ऊलझेगाँठ पड़े मजबूत।।

    वो और भड़क गईं, “अगर उसने मुझसे शादी नहीं की तो उसे ऐसा मजा चखाऊंगी कि वो भूल जायेगा चारों हाथ पैरों से बटोरा मोहब्बत का मजा। मेरी उससे शादी करवाओ नही तो उसके साथ-साथ मेरी शहादत के लिए तमाशबीनों को जिम्मेदार होना पड़ेगा…….. यहीं से कूदुंगी ए मोहब्बत जिन्दाबाज कहके।’’ – ये कहकर उसने एक कागज पर लिखी चिट्ठी नीचे डाल दी। डरते-डरते लोगों ने मोहब्बत के संगीन मसले को पढ़ा और वक्त की नजाकत को देखते हुए एक लोकल एम.एल.ए. और पुलिस को बुला लिया। उन्होने उन मोहतरमा ए खास से अपनी तशरीफ जमींन पे लाने की गुजारिश की लेकिन मोहतरमा ए खास ने किसीकी न सुनी। अंत में उस बीस साला आशिक को सोते से उठाकर लाया गया। पहले तो उस हक्के-बक्के मासूम कीये मंजर देख कर सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई फिर लोगों के कहने से उसने दिल मजबूत करके फैसला लिया और अपनी कूवते ऑडियो की ऊंची से ऊची फ्रिकवेन्सी में दोहराया ‘‘मैं तुमसे शादी कर लूंगा फलानी-फलानी मैं वायदा करता हूँ,नीचे आ जाओजान देने की जरूरत नहीं है। …….नीचे आ जाओ……….। ’’

    नारी विशेष के चेहरे पर कुछ रौनक उजागर हूई उनके हुस्ने मुबारक पर जीत के चिन्हों को बिना दूरबीन के भी देखा जा सकता था। लेकिन कुछ पलों के बाद आकाशवाणी हवा में गूंज गई ‘‘ मैं अब मर्दो के वायदों पर यकीन नहीं करती मेरी-तेरी शादी यहीं दुनिया के सामने इस शहर की टंकी पर ही होगी। नही तो मैं……..। ’’

    एम.एल.ए,पुलिस अफसर और भीड़ के हर आदमी ने ऊंची से ऊंची आवाज़ में काफी देर तक समझाया कि वहाँ शादी कैसे होगी ! बारात कैसे जाएगी !! फैरे कैसे पड़ेगे !!! मैरिज कमिश्नर बेचारे बूढ़े हैं – कैसे वहाँ तक चढ़ेगें – कोई हादसा हो गया तो शादी खटाई में पड़ जायेगी इसलिए नीचे आ जाओ………।

    नारी हठ के सामने किसी की न चली और हारकर सुबह के ताजे-ताजे हार मंगवाए गए। बेचारा इश्क का जिम्मेदार / शिकार हार लेकर किसी तरह ऊपर चढ़ा – तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दोनों ने एक दूसरे को हार पहनाएआलिंगन किया और शादी संपन्न कर ली।

नवदम्पत्ति शादी के बाद टंकी से नीचे उतरे। लेकिन उनके नीचे उतरते ही वधू को पुलिस ने आत्महत्या का प्रयास करने,पब्लिक न्यूसेंस क्रियेट करने और शादी के बाद बिना तलाक के दूसरी शादी करने के जुर्म में हिरासत में ले लिया।

    तमाशबीनों के बीच से गुजरते हुएकानून की दीवार के आर-पार चलते हुए प्रेमिका के दीदाएतर (अश्रुपूरित आँखे) ये कहने लगे-

साजन ये मत जानियोबिछुरन प्रीत घटाए।

व्यापारी के ब्याज सोबढ़त-बढ़त बढ़ जाए।।

    खैर ये तो था अफसानाए इश्क लेकिन सोचिए पानी की टंकी के प्रोहिब्टिेड (प्रवेश निषेध) और वर्जित क्षेत्र में प्रेमिका की जगह अगर कोई आतंकवादी पानी की टंकी पर चुपके से चढ़कर टंकी के पानी में जहर मिला देता तो इस शहर का क्या होता।

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