राग देश, ताल पुलिस मीडिया


Written By Amar Sneh

अभी-अभी पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है कि बचपन में दाउद गुल्ली डन्डा खेलता था। वो जिन लोगों के साथ खेलता था, पुलिस मुस्तैदी से उनकी तलाश कर रही है। देश में चारों ओर पुलिस दस्ते रवाना कर दिए गए है। कुछ वर्ष पहले मुम्बई में दाउद के घर की तलाशी ली गई और एक डन्डा उसके घर के कबाड़खाने से बरामद किया गया। काफी खोज बीन के बाद पता चला कि दाउद उस डन्डे से गुल्ली खेला करता था। पुलिस के सामने अब अहम समस्या ये थी कि डन्डा तो मिल गया लेकिन गुल्ली लापता है, जनाब गुल्ली की तलाश इस लिए की जा रही है कि उससे ये पता लगाना आसान होगा कि उसके किस-किस के साथ रिलेशन थे जिनके साथ वो गुल्ली डन्डा खेलता था। 

अंततः पुलिस को गुल्लीनुमाँ कोई चीज, जिसको गुल्ली मान लिया गया, एक खंडहर हुए मकान से बरामद हूई। इस खंडहर के मालिक को हिरासत में ले लिया गया है।

raag des, taalमुम्बई बलास्ट काँड और इससे जुड़े मुजरिमो के देश से इत्मीनान और सम्मान पूर्वक चले जाने के बाद से पुलिस पूरी तरह से आज भी एक्शन में नज़र आती है और उससे कहीं ज्यादा मीडिया एक्टिव हो चुका है। जरा, एक मिनट साहब टी.वी. पे कोई ज़ोरदार सीरियल……. नहीं ड्रामा….. नहीं ये तो लगता है समाचार है…….. हाँ समाचार ही है। -देखते रहिए परसों तक में आपका बिना फूल मालाओं के स्वागत…… हाँ तो परमेन्दर जी मैं देखते रहिए परसों तक स्टूडियो से प्रतीता – इस वक्त परमेन्दर जी आप कहाँ है ?

– जी प्रतीता जी मैं इस वक्त उन पेड़ो की जगह हूँ जिनमें से किसी पेड़ का वो गुल्ली का डन्डा है, जिससे  दाउद गुल्ली डन्डा खेलते थे।

– लेकिन हमें यहाँ से आपके आस-पास कोई पेड़ दिखाई नहीं दे रहा है।

– प्रतीता जी ये बात सही है कि यहाँ कोई पेड़ नहीं है लेकिन ये बिलकुल तय है कि भूत काल में यहाँ पेड़ थे -मैं आपको महत्वपूर्ण सूचना दे रहा हूँ कि वो सज्जन हमें मिल गये है जिन्होने ये बताया कि यहाँ पेड़ थे हमारे प्रमुख संवाददाता बहादुर सिहँ जी उनके साथ हैं।

– धन्यवाद परमेन्दर जी……. हाँ बहादुर सिहँ आपको मेरी आवाज आ रही है ?….. मैं परसों तक देखते रहिए यही समाचार से प्रतीता। ये बताइए आपके साथ जो सज्जन खड़े है क्या ये वही है ………..

– आपका अनुमान बिलकुल सही है प्रतीता जी, ये सज्जन वही है इनसे मेरी भेटं 3 मिनट 2 सेकन्ड पहले हूई अभी कुछ देर पहले पुलिस इनसे पूछ ताछ कर चूकी है, हाँ तो पन्डित शान्ति लाल जी हमारे दर्शक जो बड़ी उत्सुकता से ये जानना चाहते है कि पुलिस से आप की क्या बात हूई – ज़रा बतलाइए……….

– मुझे कम दिखाई देता है पुलिस ने पूछा ये क्या है, मैने छूके बता दिया कि ये डन्डा है – पुलिस ने पूछा कहाँ से आया मैने बताया कि लकड़ी का है पेड़ से ही आया होगा। पुलिस ने पूछा किस पेड़ से…… मैने सूंघ के बता दिया कि आम के पेड़ से। पूछा पेड़ कहाँ है – मैने बताया कि मेरे घर के पास आम का पेड़ था। पुलिस ने बस मेरे घर की तलाशी लेनी शुरू कर दी। मेरे घर से पुलिस को एक फोटो मिला…. पुलिस ने मुझसे पूछताछ की, मैने बता दिया कि, मेरे घर के बाहर जो आम का पेड़ था उसी के साथ मेरा फोटो है। – बस पुलिस ने कहा ये फोटो हम ज़प्त कर रहे है अब ये बता तेरा दाउद से क्या सम्बन्ध है क्योंकि दाउद की गुल्ली का डन्डा जिस पेड़ का है उसी पेड़ के साथ तेरा फोटो है। पुलिस चौकी में मुझे पुलिस अफसर तलब कर गए हैं वहीं जा रहा हूँ…………

– बहादुर सिहँ जी हमारे दर्शक उस फोटो को देखने के लिए तरस रहे है

– प्रतीता जी दर्शको की फरमाइश बहुत महत्वपूर्ण है उसका सम्मान करते हुए हम उन्हे हरा भरा सब्ज़ बाग ही दिखा देते हैं। जिस बाग की किसी पेड़ की कलम से वो पेड़ लगाया गया था जो बहादुर सिहँ जी के घर के बाहर कभी था और जिसकी किसी डाल से दाउद की गुल्ली का डन्डा बना था प्रतीता जी उस बाग में हमारे संवाददाता शमशेर जी वहाँ मय जिस्म के मौजूद है……. ओवर टू शमशेर जी………………

– मैं शमशेर सिहँ देशवासियों और परसों तक न्यूज चेनल की तरफ से बधाई का हकदार हूँ कि मैने ही वो बाग खोज निकाला है जिसके किसी पेड़ की कलम से वो पेड़ लगाया गया था जिसके डन्डे से दाउद ने गुल्ली खेली थी और जिस पेड़ के साथ पन्डित जी का फोटो है। जहाँ मैं खड़ा हूँ इसके दक्षिण में ये बाग देख रहे हैं यही है वो बाग, जिसके किसी पेड़ की कलम से वो पेड़ वजूद में आया, जिसके डन्डे से दाउद गुल्ली खेलता था। एक और महत्वपूर्ण सुराग हमें अभी लगा है जसकी सुचना अभी पुलिस को नहीं है, कहते हैं कि दाउद की पतंग इसमें से किसी पेड़ में अटक गई थी और उसे जिसने उतारा था वो उसी वक्त से फरार है, वो बहुत शातिर चालाक था उसे मालूम था कि मुम्बई ब्लास्ट के बाद दाउद के देश से चले जाने के बाद भविष्य में कभी भी पुलिस उसे ढूँढेगी, हो सकता है वो भी पाकिस्तान, अफगानिस्तान, दुबई में छिपा बैठा हो हमारी खोज जारी है शीघ्र ही उसका भी पता चल जाएगा……. हाँ इस वक्त बाग के मालिक और माली हमारी टीम के यहाँ पहुँचने से पहले ही अंडरग्राउन्ड हो गए है – यहाँ से बस इतना ही मैं परसों तक से शमशेर सिहँ। ओवर टू स्टूडियो।

– धन्यवाद शमशेर सिहँ जी इससे पहले हम बम्बई बलास्ट कांड में अपनी खोजी इनोवेटिव रिजल्ट ओरियंटेन्ड टीम के माध्यम से आगे बढे देखते रहिए यही समाचार इसी तरह परसों तक……. एक लम्बा ब्रेक…… झय्यम-झय्यम डंग-डंग………

(यह व्यंग नव भारत टाइम्स, दैनिक ट्रिब्यून, आज का आनंद, नयी दुनिया, शिवम में प्रकाशित)

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