आतंकवाद का भारतीय हल


बम कांडों के बाद रस्मे सर्तकता का मौसम आता है हमारे यहाँ। इस मौसम में परम्परागत पुलिस, सुरक्षा से संबन्धित सारे विभाग एक्शन में आ जाते है। – मुबारक हो, सर पे हाथ धरे हमें, बार बार के बाद एक बार फिर, हमारे हाथ लगा पाकिस्तान का हाथ। – इस हाथ से दोस्ती का हाथ मिला के, हिलाते-हिलाते जमाना गुजर गया। छोडि़ये दोस्ती में दखल कम अक्ल का काम है।

aatankvaad ka bhartiy halजनाब इस रस्मे सर्तकता का नया अंदाज मुलाहिजा फर्माइए। – मुम्बई में शासन-प्रसाशन के सख्त आदेशों के तहत किराए (भाड़े पर)पर मकान लेकर रहने वालों के लिए पुलिस विभाग से एन.ओ.सी. लेना आवश्यक है। एन.ओ.सी. न लेने वाले के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाही की जाएगी। इसमें किराएदारों से क्वालीफिकेशन के साथ-साथ स्कूल और कालिज की तफसीलें भी माँगी जा रही है, चाहे किराएदारों की उम्र अस्सी वर्षो के ऊपर ही क्यों न हो। – यहाँ तक ही नहीं, अगर किराएदार अकेला है तो उसे एन.ओ.सी. दी ही नहीं जाएगी। यानि, कोई भी अकेला-अकेली, कुवाँरा-कुवाँरी, विधवा अकेली को किराए का घर नहीं दिया जाएगा। – इन अकेलों की शामत-अभियान के पीछे शायद ये सोचा जा रहा है कि दुकेले लोग अपनी एनर्जी और लयाकत बच्चे बनाने में लगा देते हैं तो छड़े-अकेले लोग अपनी पूरी लयाकत और एनर्जी देश द्रोह में, बम बनाने और उसे फोड़ने में ही लगाते रहते हैं – क्या अनोखी सूझ-बूझ का कानून है देश को खतरों से बचाने का। खुदा करें हमारी इस सूझ-बूझ को किसी की नजर न लगे।

   अभी सुनने में आया है कि मेरिज ब्यूरो के एजेन्टो ने इस समस्या को हल करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है – शायद वो सरकार को भेजें कि अकेले-अकेले रहने वाले नरों और मादाओं की फहरिस्त (सूची) तैयार करके उन्हे कानूनी तौर से बाध्य किया जाए कि वो शादी करें – ताकि भविष्य में होने वाले बम कान्डो से देश को बचाया जा सके। बड़ा आशिकाना सर्तकता फार्मूला है साहब। मुझे तो लिखते हुए ही शर्म आ रही है क्योंकि भारतीय कुवारों को शादी के नाम से शर्माने की खास आदत है। – जनाब इसे मामूली बात न समझें, बहुत दूर की कौड़ी है – मुझे पता चला है कि ये मेरिज ब्यूरो वाले दवाएँ भी बेचते हैं बूढ़ो को जवान बनाने की। – जाने दीजिए चाहे ये कितना भी लोक हित और देश हित का फार्मूला क्यों न हो, मुझे तो इसमें भी पाकिस्तान का हाथ नजर आता है। आखिरकार भविष्य के बम कान्डो में मारने के लिए शायद उनके हिसाब से हमारी आबादी कम नजर आ रहीं है उन्हे, और आबादी उनके हिसाब से बढ़ानी जरूरी है। अब ज्यादा शादियां होंगी तो ज्यादा बच्चे होंगे। फिर उन्हे पाल-पोसकर पढ़ा-लिखाकर जवान बनाया जाएगा। जाहिर है वे बमकांड में शहीद होंगे। उन्ही में से कुछ को आतंकवादी भी बनाया जा सकता है। इसलिए यह पाक के हित में है कि हमारी पॉपुलेशन बढ़े। मैं इस ओर मानवाधिकार आयोग का ध्यान आकर्षित करना जरूरी समझता हूँ। वह इस मसले पर संजीदगी से कार्रवाई करे और अकेले व्यक्ति को भी घर में मानवीय गरिमा के साथ रहने का अधिकार दिलाए। सरकार जल्दी से इस दिशा में कदम उठाए वरना कुंआरे ‘‘ शादी से बचाओ’’ आंदोलन शुरू कर देंगे। अब प्रशासन आतंकवाद से लड़ेगा कि इस अंदोलन से निपटेगा। इसलिए बेहतर होगा कि अकेले रहने के अधिकार की रक्षा की जाए। यह पाकिस्तान को एक मुंहतोड़ जवाब भी होगा। हम उनकी मर्जी से अपनी जनसंख्या नहीं बढ़ाएंगे।

   वैसे इस पूरे मंजर को देखकर लगता है कि पाक आतंकवादी कर्मकांडी होते है। उनमें अदृश्य होने की क्षमता है। वे अदृश्य हो हमारी सीमा में दाखिल होते हैं। फिर अदृश्य स्थानों पर रहकर तंत्र-मंत्र से हर ठिकाना जानकर अपने पवित्र कारनामों को अंजाम देकर अदृश्य हो जाते हैं। क्या करें, हमारी सुरक्षा एजेंसियों को केवल हाथ भर देख पाने की विद्या हासिल है। आशा है इस देश के नजूमी, हस्तरेखा विशारद, तांत्रिक-मांत्रिक मदद के लिए आगे आएंगे, क्योकि आतंकवाद को कर्मकांड के मोर्चे पर भी मात देनी होगी। इसका एक रास्ता यह हो सकता है कि सरकार कुंआरों को कर्मकांड और तंत्र-मंत्र में दीक्षित करें। इससे बेरोजगारी भी दूर होगी और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष भी मजबूत होगा। लेकिन इस अभियान की शुरूआत तभी हो सकती है जब कुंआरों को किराये पर मकान मिलें या जब तक उन्हें मुम्बई में अकेले रहने की अनुमति मिले जब तक वो कन्दराओं में और पेड़ो पर रहना न सीख जाए।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s