Ragani – Story For Film


©-Amar Sneh

जैसे–जैसे रागणी यौवन की सीढियाँ चढ़ रही है, लगता है इन वादियों की पहाड़ी सुंदरता उसमें समाती जा रही है। रूप, वाणी, मन व्यवहार सभी कुछ तो सुंदर है, जिसे भी वो एक नजर देख लेती है वही मन्त्र-मुघ्ध हो जाता है। रागणी के परिवार वाले न जाने कबसे उसकी शादी के लिए कोई उपयुक्त वर की तलाश में है लेकिन उसका मांगलिक होना उसकी शादी में सबसे बड़ी बाधा है। अब तो और भी बातें जुड गयी हैं। अभी कुछ दिन पहले वो अपनी कॉलेज की सहेलियों की साथ उपर की पहाड़ियों पर घूमने गयी और वहां आक्सीजन की कमी की वजह से बेहोश हो गई तो वहीं गांव के एक चेले (यहाँ पुरोहितों के नीचे कर्मकांडों को साधने के लिए चेले होते है जो धर्म धंधा चलाते है) ने उस पर प्रेत का साया बताकर और मुसीबतें खड़ी कर दी। बात यहीं खत्म नहीं हुई। जब वो लौट कर घर आ गई तो यहाँ के स्थानीय जोगणी मंदिर के गूर (पुजारी-जिस पर देवीदेवताओं का आह्वान होता है) और एक ज्ञानी पंडित ने बताया कि इसकी तो कुंडली में ही दोष है। इसलिए तो पुरे गांव में मुसीबतों के पहाड़ टूट रहे हैं। किसी भी गांव में ऐसी कन्या–स्त्री का होना अच्छा नहीं है इसके अपने परिवार के लिए भी अशुभ है। उन्होंने महाभारत का हवाला दिया कि कुंडली में मांगलिक दोष दूर करने के लिए गांधारी की शादी धृतराष्ट्र से करने से पहले एक बकरे से करवाई गई थी। ताकि पति का जीवन बच सके, पर यहाँ ऐसी स्थिति में कन्या कि शादी कुते से करवाने की प्राचीन परम्परा है। यहाँ देवताओं की हुकूमत चलती है, देवता गूर-चेलों की देह में प्रवेश करके जो बोलता हैं वहीं अंतिम होता हैं। रागणी और उसके परिवार वाले बेबश हैं, इसलिए रागणी की शादी एक कुते से करवाई गयी। शादी की सभी रस्में फेरे, आदि विधि-विधान, गाजा-बाजा, मंत्र पूजा, खाना पीना सब वैसा ही हुआ जैसा शादियों में होता है। क्या कोई जान सकता है कि ऐसी बेबसी से रागणी के मन पर क्या बीत रही होगी। बदकिस्मती, बेबसी, बेचारगी की जो हीन भावना उसमें पैदा हुई, उससे उसकी आत्मा, मन और सोंदर्य जैसे कुम्लाह गया। वो मुँह छिपाकर अब अक्सर रोती रहती हैं। लेकिन पूरा गाँव, देवता, धर्म के अलम्बरदार सभी खुश है कि उन्होंने ऐसा करके न केवल धर्म का पालन किया है बल्कि गाँव, परिवार, कन्या और भविष्य में होने वाले पति कि भी रक्षा कर दी है।

रोहडू गाँव की माघी देवी ने एक शादी के अवसर पर रागणी को देखा था। उस वक्त उसका बेटा ढोलाराम भी उसके साथ था। माघी ने रागणी को देखते ही मन मै सोचा था कि ऐसी सुंदर और सुशील कन्या उसके घर बहू बन कर आ जाए तो उसका घर स्वर्ग बन जायेगा। लेकिन इतनी सुंदर और ऊँचे घर की कन्या उसके नसीब में हो सकती हैं क्या? उसने मौका पा कर रागणी की माँ से डरते-डरते रागणी की तारीफ करते हुए, अपने लड़के के लिए प्रस्ताव भी दे डाला। लेकिन रागणी की माँ ने कोई विशेष रूचि नहीं दर्शायी। लेकिन आज परिस्तितियाँ बदल गई है। –एक तरफ कुते से शादी होने पर लोगों की फब्कियाँ, मजाक और उनकी हेय दृष्टि। दूसरी तरफ हर छोट-बड़े को उसके रूप में प्रेतनी की छाया नज़र आती है। रागणी की मनोदशा भी दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। उसके परिवार वालों की चिंता बढ़ने लगी। उसे इन परिस्थियों से निकाल पाने का सिर्फ एक ही प्रयाय है कि उसकी शादी जल्द से जल्द कहीं हो जाये। काफी कोशिशों के बाद उन्होंने माघी से बात की और रागणी की शादी माघी के लड़के ढोला राम से तय हो गई।

लेकिन शादी होने के बाद जब बारात घर लौट कर आई तो इसी रोहडू गाँव के एक सयाने ने एक नयी बात खड़ी कर दी, वो गाँव के देवता बकरालू के गूर (गुरु) को लेकर वहां पहुंचा और गाँव में पंचायत जोड़ दी। उन्होंने बताया कि जिस कुते से रागणी कि शादी हुई थी उसे जीवित देखा गया है। इसका मतलब है कि कन्या में प्रेत का साया अभी भी बाकी है, जब तक कुता मरता नहीं, तब तक रागणी के पति और ससुराल पीहर के दोनों गाँव पर खतरा बरकरार है। सभी ने धर्माचार्यों से मिलकर तय किया जब तक कुता मरता नहीं, तब तक ढोला राम अपनी ब्याहता पत्नी के साथ कोई शारिरिक संबंध ना बनाएँ। ये आदेश ढोला राम के घरवालों को भी दे दिया गया कि दोनों पति पत्नी को अलग रखा जाये, जब तक देवता की आज्ञा ना मिले। बकरालू मंदिर के गूर ने मंगल के दिन बकरालू देवता की चौकी पर ढोला राम और उसकी पत्नी की हाजरी का आदेश दिया। अब तो ढोलाराम के परिवार और गाँव वालों की चिंताएँ भी बढ़ गई। –मंगलवार को नव-दम्पति बकरालू की चौकी पर पहुंच गए साथ में सभी परिवार के सदस्य और गाँव के हितैषी भी अब हाजरी बजा रहें हैं।

बकरालू देवता का आवाहन हुआ, –देवता गूर के अंदर प्रवेश करते ही खेलने लगे –और खेलते-खेलते रागणी पर नजर पड़ते ही वो कुछ क्षण शांत हो गए। लगता है गूर पर रागणी के सोंदर्य का गहरा प्रभाव पड़ा और वो मन ही मन कोई मंत्रणा बना रहा है। कुछ देर के विराम के बाद वो दुबारा खेलने लगे। नव दम्पति का पूरा परिवार देवता की चौकी के सामने हाथ बांधे खड़ा है। गूर के शरीर में देवता का प्रवेश होते ही वो हाथ में सांगल और गज लिए खेलने लगा। कारिंदे और उसके चेले एक्शन में आ गए, ढोल नगाडों के गमक-धमक और रणसिंघों की ऊँची आवाज से पूरा वातावरण गूंज उठा। चेले गूर के माथे पर सिंदूर लगा-लगा कर फूलों की वर्षा करने लगे और साथ ही कुछ चेले लोगों पर भी पंचगव्य की वर्षा करके वातावरण निर्मित करने लगे। -काफी समय बाद उनके हाथ ये परिवार लगा है, उन्होंने सोचा, नयी शादी के मौके पर पैसा-धन तो इस परिवार के पास होगा ही, परिवार पर मनोवैज्ञानिक दवाव तो बन ही गया है। –ऐसे में नव दम्पति, परिवार और ससुराल पीहर के दोनों गॉंव को बचाने के लिए सारे हथकंडे अपनाये जा सकते है। यही सब सोच समझ कर गूर और उसके चेले अपने करतब दिखाने में कोई कर कसर बाकि नहीं छोड़ना चाहते।

गूर आंखे तरेर कर इन सबको देखते हुए माघी देवी की तरफ मुखातिब हुआ तो वो हाथ जोड़कर घुटने के बल बैठ गई। गूर दहाड़ा, “तेरी बहू पर प्रेत की छाया अभी है- अभी है…. उपाय का कोल भर…. कोल भर….. ।” बेचारी भयभीत माघी ने हाँ कर दी। तभी गूर ने उससे भी ऊँची आवाज में हुंकार भरी और बोला, “तूने नारसिंघ देवता को नाराज किया था…. –तू क्या समझती है…. नारसिघ मामूली देवता है…. अरे वो महाशक्तिशाली है, उसका संबंध सीधा यमलोक से है। तुने उसकी पूजा की अनदेखी की थी…. वो पुरे परिवार का नाश करके रहेगा। तेरे से सभी देवता नाराज है तेरे ससुर ने भैरव से तेरी गोद में लड़का हो जाये इसके लिए मन्नत मानी थी…. वो तो मर गया लेकिन मन्नत पूरी नहीं की, उसका भार भी तेरे परिवार पर अभी बाकी हैं… मैं इस गाँव का देवता हूँ…. अगर किसी ने किसी भी देवी देवता का अपमान किया या उसकी पूजा में कोई कोताही की…. तो में उसे कभी नहीं छोडूगा…. नहीं छोडूगा। उसका कर्ज सभी को अदा करना ही होगा…. जिन-जिन देवताओं का तुम लोगों पर कोई पूजा कर्ज बाकि है उसे अदा करना ही होगा……….रुक……. में उन देवताओं का भर बार डालता हूँ उनका आवाहन करता हूँ………… चोकी पर भैरव जागें……. भैरव जागें……….।

ढोल नगाडे, शहनाई पर लय बदल जाती है देवता के आह्वान पर प्राय ऐसा किया जाता है। गूर के शरीर पर अब भैरव का प्रवेश हो चूका है, चेले उनके स्वागत में सिन्दूर गूर के माथे पर मल कर पुष्प वर्षा करने लगे। कुछ चेले शराब की छींटे उड़ा कर भैरव की जय-जयकार करने लगे। गूर ने आंखे तरेर कर परिवार को गौर से देखा। गुस्से से फुंकार भरी तो पूरा परिवार थर-थर कांपने लगा। माघी तो बिलख-बिलख कर रो पड़ी, तभी भैरव ने गुर के मुख से वही सभी कुछ बखान किया, “तेरे ससुर ने तेरी गोद के लिए लड़का माँगा था……… उसने अपने मन में मुझे प्रसन्न करने की मनन्त मानी थी…….. मैंने मनन्त तो पूरी कर दी थी………. इस ढोला राम को पैदा करवा के…….. लेकिन मुझे प्रसन्न करने का वादा पूरा नहीं हुआ………. मैं अब पुरे गाँव के साथ तेरे घर को भी कभी चैन से नहीं रहने दूँगा……. नहीं रहने दूँगा। सबका नाश करके में अपने अपमान का बदला लूँगा…………..।” -तभी चेलों ने माघी के पास आके उसे नाक रगडकर माफी मांगने और पूजा करके मनन्त पूरी करने की प्रार्थना करने को कहा। माघी ने वैसा ही किया और चौकी के सामने कोल भरा कि वो भैरव की पूजा को अंजाम देगी। लेकिन भैरव अभी भी क्रोध मै है वो फिर बमका, “बकरों की बलि चाहिए…..मुझे पांच बकरों की बलि चाहिए।तुम सब दंड के भी भागी हो………।” यह कह कर उसने बर्तन से चावल के दाने उठाये और माघी ने उन्हें पल्लू में ले लिया। चेले ने चावल के दाने गिने और माघी को इक्कीस सौ रुपये दंड के रूप में अदा करने को कहा। माघी ने दंड अदा करने और पूजा करने की हामी भरी। भैरव यह कह कर गुर के शारीर से निकाल कर चले गए तो गूर ने बहू को छोड़ कर सभी को जाने का इशारा किया और वो सब दूर जाकर बैठ गए।

अब गूर ने नरसिंघ देवता का आह्वान किया।–सभी चेलों ने देवता का जयघोष किया और सिंदूर और हार से स्वागत किया। रसिया रूप में गूर ने रागणी को निहारा और सारी बातें दोहराने के बाद कोल भरने को कहा, चेलों ने इशारे से हामी भरने का इशारा किया तो रागणी ने कोल किया। देवता नरसिंघ ने कहा,“मुझे इक्कीस दिन की पूजा चाहिए, मेरा साया जिस पर पड़ जाता है वो बस मेरा ही होता है। मेरी शरण में विधि-विधान के साथ, परिवार-पति को भूलकर मेरी पूजा, मेरा ध्यान, मेरी मायावी शक्ति में विश्वास, मेरा ही वचन निभाना होगा। तभी सुख-शांति मिलेगी तुझे……. बोल और कोल भर….।” —-रागणी ने सहमति से कोल किया और देवता गूर के शरीर से प्रस्थान कर गए।

पुनः बकरालू देवता ने आदेश दिया,“ये पूजा तुझे चौबीस घंटे में शुरू करनी ही है…..इस बीच पति से दूर रहना है…. और पवित्रता को बनाये रखना है। समझ गई ना?”

उसे जाने की अनुमति देकर देवता दूसरे शरणागतों के दुखड़े सुनने लगे। यहाँ दुनिया की हर समस्या लेकर लोग आते है और उन्हें हर समस्या के निदान का उपाय देवता इसी तरह देते है। चेलों ने ढोलाराम के परिवार को हर पूजा के लिए विधियाँ और पूजा सामग्री धन आदि को विस्तार से समझा कर लम्बी-लम्बी लिस्टें थमा दी। हर देवी देवता की पूजा की सूची यहाँ पहले से ही तैयार रहती है बस केवल उस पर श्रधालु का नाम अंकित करना पडता है।पहली पूजा नरसिंघ की होनी है, उसके बाद भैरव और प्रेत मुक्ति की। परिवार चढावा चढ़ाकर चलने लगा तो एक चेले ने हिदयात दी कि सरकार बली बंद करने जा रही है इससे पहले ही भैरव की पूजा करने का विधान करना होगा। समय कम है वरना जिंदगी बार भुगतना पडेगा।

घर पहुंचकर ढोलाराम, भदरू उसके बाप और माघी में कहा सुनी हो गई। भदरू ने माघी को सभी देवताओं के अपमान का जिम्मेवार ठहराया और ढोला राम की रागणी से शादी कराने पर भी उससे कहा सुनी हुई। बेचारा ढोला राम क्या करता, शादी हुई या ना हुई उसके लिए बराबर है, उसने दारू पी और अकेले अलग कमरे में जाकर सो गया।

सुबह भदरू और ढोला राम ने सभी देवताओं की पूजा का हिसाब लगाया तोपच्चीस हजार निकला। घर में जो कुछ था वो तो शादी में लग गया था। वो दोनों घर के कागजात लेकर पास के साहुकर के पास गए। तीन बीघा जमीन के कागजात रख कर, इस शर्त पर कर्ज मिला की उन्हें पच्चीस सौ रूपये ब्याज के हर माह देने होंगे और पांच साल में पूरी रकम नहीं दी तो जमीन साहूकार की हो जायेगी। साहूकार शाह जी ने परनोट लिखकर कर्ज दे दिया।

जब तक दूसरी पूजाओं की तैयारी होगी, नारसिंघ के साये के निदान के लिए रागणी को मंदिर में इक्कीस दिनों के लिए उसकी सास उसे मंदिर की सराय में नारसिंघ को समर्पित करके चली गयी। अब उसे हर रोज की पूजा में शामिल होना है और बाकि बचे समय में गूर के घर के कामों में हाथ बंटाकर अपना धर्म निभाना हैं। मन वचन से वो अब नारसिंघ को समर्पित हैं और उसे उसी की दुनिया में रमे रहना है।दो ही दिनों के बाद पुरोहित गूर जी ने उसे अलग बुलाकर उसके कान में कहा कि देवता तुझसे बहुत प्रसन्न है और अब तुझे उन्हें प्रसन्न ही बनाये रखना है। आज रात देवता नारसिंघ मेरे रूप में तेरे पास आयेंगे, बस वो जैसा कहे वैसा ही करना….. तू इस समय देवी रूप है…. बिना शीशा देखे श्रृगार करके शाम को पूजा के बाद तुझे देवता की तरफ से वस्त्र दिए जायेंगे उन्हें पहन लेना, देवता जरूर आयेगा। ध्यान रहे तू अब रागणी नहीं देवी है ।

देवता शाम ढलने के बाद गूर पुरोहित के रूप में उसके एकाकी कमरे में दाखिल हुए मुस्कुराकर देवता ने देवी को देखा, देवता-देवी का मिलन हुआ और पूरी रात देवता-देवी को अपनी बाँहों में लेकर सोये रहे और अंत में देवी-देवता एक पूर्णमिलन हो गया। अब प्रतिदिन ये ही क्रम चलने लगा मदमस्त जवानी में उसे देवता का संग भाने लगा। अब तो हर रोज वो परमानन्द में डूबी देवता की प्रतीक्षा करती है। इक्कीस दिनों तक दैवीय अलौकिक सुख भोग कर जब अंतिम पूजा हुई तो उसके चेहरे पर अलोकिक सोंदर्य था, वो स्वयं इस सोंदर्य को नहीं देख पाई क्योकि शास्त्रानुसार शीशा देखना इस वक्त वर्जित है।

सारी पूजाओं के साथ पचीस हज़ार का लिया कर्ज भी समाप्त हो गया। इस परिवार की कामनाएं पूरी हुई या नहीं पर पंडित पुरोहितों और धर्म साधकों की कमानें जरुर पूरी हो गई।

जिंदगी के पहले कदम पर ही हमे नज़र आने लगा है कि यह पुराण पंथी, जीर्ण छिर्न मान्यताये, अंधविश्वासों में पली परम्पराएँ और धर्म आडम्बरों के चलन किस तरह से भोली भाली जिंदगी और उसके हसीन ख़्वाबों को नोच नोच कर उसे कुरूप बनाने में कोई कसर बाकि नहीं रखते है। धर्म का यह समाजी बहरूप कोई महाशक्ति बन कर हमे निरंतर कमजोर ही बनाता आ रहा है और कमजोर बने रहने में ही हम अपनी भलाई समझते है।शोषण और इन जुल्मों के खिलाफ धर्म के पत्थर के नीचे हमारी आवाज दब जाती है और सिर्फ हम अपने में छटपटा और कसमसा कर रह जाते है।

इस हादसों ने इस कहानी के दो बेगुनाह भोले भाले किरदारों को एक नए मनोवैज्ञानिक धरातल पर ला कर पटक दिया है। रागणी को अब अपनी खुली आँखों में भविष्य का कोई दुस्वप्न हमेशा परेशान करने लगा है, उसे लगता हैकि कही समाज कलंकित करके उसके जीवन को गर्त में पहुंचा देगा और फिर वो कही की ना रहेगी। वो इसी मानसिक दबाब में बिना वक्त गँवाए ऐसी अस्भाविक पहल कर बैठती है कि जैसे वो किसी का शिकार कर रही है, जबरन हम बिस्तरी की ललक में उसके रोम रोम से फूटती चिंगारियां, दहकता खूबसूरत तन बदन देख कर उस पति भयभीत हो जाता है, उसे लगता है जैसे रागणी के खूबसूरत चेहरे में कोई चुड़ैल उसके जीवन को समाप्त करने की कशिश में लगी है। उसकी मर्दानगी ठन्डे पसीने में तब्दील होने लगाती है और वो ऐसे मौकों पर किसी तरह से बहाना बना कर घर से निकाल जाया करता है। कभी कभी वो रात में अपने पडोसी हमराज दोस्त के यहाँ रात बिताने चला जाता है जो देर रात कंप्यूटर पर बैठ कर वेबसाइट डिजाइन किया करता है। और दिन में सोया करता है उसने भी कम्पुटर का बेसिक कोर्स किया हुआ था और शादी से पहले भी रात रात भर उसके साथ कम्पुटर की बारीकियां सिखने में बिताया करता था। इसलिए उसके घर वालों के लिए यह कोई असभाविक स्थिति नहीं थी।ढोला राम को एक तर्क खाए जा रहा है कि अगर प्रेत बाधा का पहला धार्मिक उपचार विफल हो गया है तो क्या ठीक है कि ये पूजा उपचार भी कामयाब हुए होंगे? अब तो बस वो यही सोचता है कि वो कुत्ता जिस से रागणी की शादी की गई थी वो अगर जिन्दा है तो से रागणी से दूर ही रहना होगा। आखिर ये सके जीवन का सवाल है।

रात गई और बात गई दिन निकलने पर रागणी स्वयं को सामान्य कर लेती है। उसकी सुंदरता उसका आती मोहक व्यवहार का जादू घर और मोहल्ले को इतना मुग्ध किये हुए है कि इसके ससुराल वालों को अपनी बहू पर गुमान होने लगता है। ढोला राम भी उसका कायल है लेकिन अंतर के तूफान ने उसे घर से दूर कर दिया है उसने कुछ ही दिनों में दूर किसी शहर के एक होटल में नौकरी कर ली है। असिस्टेंट मनेजर का काम जानने और सिखने में उसके दो महीने तक साँस लेने की फुर्सत नहीं मिली। दो महीने बाद दो-तीन दिन की छुट्टी मिली और सारी परिस्थितियां सामान्य सी लगी। अब तो मन का द्वंद भी समाप्त जैसे हो गया है। आर्थिक संकट से जूझते परिवार को सहूलियत महसूस होने लगी है। वो सामान्य परिस्थितियों में रह कर वापिस अपने काम पर लौट गया।

रागणी चाहती है कि वो जल्द से जल्द अपने पीहर चली जाये। वो गर्भवती है और दिन बढते चले जा रहे है। घर खेती के कामों से मुक्ति दिलाने के लिए रागणी को उसके माँ बाप ने बुला लिया है। बीच बीच में कभी कभार ढोला राम भी अपने ससुराल चक्कर लगा लेता है।

माँ के घर पर ही लडकी का जन्म हुआ तो धार्मिक क्रियाएँ शुरू हो गई नामकरण,छट, घर शुद्धि के लिए हवन आदि के बाद रागणी अपने ससुराल आ गई। लेकिन इस बीच एक अप्रिय घटना घटी रागणी की सास को खेतों में काम करते हुए सांप ने काट लिया। झाड फूंक के चक्कर में वो बच ना पाई शोक के दिनों में ही गॉंव के एक पढ़े लिखे व्यक्ति ने उन्हें लताड़ा कि “उसकी मृत्यु झाड फूंक के चक्कर में ही हुई है। अस्पताल ले जाते तो बच जाती थी। ओझा जी के चक्कर में जो लोग बच जाते है, दरअसल उस सांप में जहर होता ही नहीं है। हर सांप में जहर हो जरुरी नहीं। लोगों में भ्रम है कि ओझा ने अपनी झाड फूंक से बचा लिया है।“ माघी तो चली गई,पंडित जी ने भी अपनी धार्मिक तुरूप चाल चली कि पिछले जन्मों के कर्मों का फल तो भोगना ही पडता है। ना हो तो माता से इस बात को साबित करवा सकता हूँ। उनके घर पर ही पंडित जी ने माता की चौकी लगा दी और माता ने वही कहा जो पंडित जी ने कहा था। लेकिन इस परिवार में बच्ची के पैदा होने के बाद ही जब यह घटना हुई है तो बच्ची के जन्म को लेकर माता ने और भ्रम पैदा कर दिए। उन्होंने कहा बच्ची का आगमन इस घर के लिए ठीक नहीं है इनके परिवार की सामान्य परिस्थितियों में फिर से भूचाल पैदा हो गया।

जितने मुँह उतनी बाते लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि बहू के मायके वालों ने अपनी मुशीबत यहाँ डाल दी। वहां देवता से पूछ लेते तो यहाँ ससुराल पर संकट ना आता। जहालत के जंजाल ने इन्हें इतना मजबूर कर दिया कि रागणी अपनी बच्ची को लेकर पीहर आ गई। डेढ़ साल का अरसा गुजर गया है रागणी अपने सद व्यवहार और सोच से ससुर के अकेले घर में रहने से परेशान है यहाँ घर में रोटी पानी करने और खेतों आदि में काम करने वाला भी तो कोई नहीं है वो अपनी ससुराल आ गई लेकिन बच्ची अपने नाना नानी से इतना घुल मिल गई है कि ना तो वो उसे छोडते है और ना ही वो यहाँ रह पाती है। बार बार ढोला राम को उसे वह छोड़ कर आना पडता है क्योकि वहाँ उसकी देखभाल करने वाले बहुत से लोग है। जैसे तैसे करके दिन गुजर रहे है बच्ची वहाँ स्कुल जाने लगी है। ढोला राम अक्सर ससुराल जाता है एक दिन जब वो बच्ची को स्कुल से लेकर आ रहा था तो एक स्थानीय महिला ने बच्ची को प्यार किया। वहीँ पास में एक कुता महिला को देख कर उसके आस आ गया। तो महिला ने ढोला राम से कहा यही है वो कुत्ता जिससे रागणी की शादी हुई थी।अक्सर मेरे ही घर पर आ कर बैठा रहता है। हमारे पुरे परिवार से बहुत हिला मिला हुआ है। यह सुन कर जैसे ढोला राम में बिजली कौंध गई और ढोला राम फुसफूसाया, “इसका मतलब है प्रेत बाधा अभी…….” आगे कुछ कहने से उसने खुद को रोक लिया। कुछ देर शांत रह कर उसने खुद को सामान्य किया और विदा ली। ससुराल पहुँच कर उसने अपने ससुर को बताया कि कुता तो अभी जिन्दा है और उसने उसे खुद देखा है। ससुर ने उसे आश्वस्त किया कि वो इस सिलसिले में मंदिर के गुर से बात करेगा। उसे चिंता नहीं करनी चाहिए सब ठीक हो जायेगा।

उसे शाम को ड्यूटी पर पहुँचाना है वो निकल तो गया लेकिन मन में ये बात अटकी है कि कुता तो अभी जीवित है। उसके होटल के मालिक बड़े धार्मिक विचारों के है। उनके गुरु जो सिद्ध तंत्र मंत्र का धंधा करते है, वो आजकल एक अनुष्ठान करने के लिए होटल में ही विराजमान है। ढोला राम ने मौका निकाल कर उनसे बातचीत की तो उन्होंने ध्यान लगा कर उसे सर्व सिद्धि और रक्षा कवच के लिए दो सिद्ध तंत्र दे दिए। इकीस-इकीस हज़ार के तंत्र मालिक के गुरु होने के नाते उन्होंने कंसेशन कर के केवल पांच-पाच हज़ार में दे दिए और कहा कि यह तंत्र रक्षा तो करेंगे ही साथ में सुख समृद्धि भी बनी रहेगी।इस तंत्र को आज रात अपनी तकिया के नीचे रख कर सो जाना और अपने घर ले जाकर पूजा के स्थान पर रख देना।उसने वैसा ही किया घर जा कर तंत्र को पूजा के स्थान पर रख दिया।आज ही उसके ससुर ने उसे फोन कर के सूचित किया कि वो कुता मर गया है। इस सुचना को पा कर वो बहुत खुश हुआ और उसकी मालिक के गुरु पर श्रधा और भी बढ़ गई।वास्तविकता यह है गुर के चेलों ने कुते को जहर दे कर मार डाला है। ताकि वो अपनी शक्तियों को सच साबित कर सके।

कई वर्ष बीत गए है वो अब सामान्य जिंदगी बिता रहे है लडकी सयानी हो चुकी है। इधर यहाँ की बस्ती में काफी परिवर्तन आ चूका है। कुछ ही समय पहले जब यहाँ एक कॉलेज खुला तो रागणी ने अपनी लडकी नैना को यही बुला कर आगे पढाने का निश्चय कर लिया। उसे मायके वाले भी चाहते थे कि लडकी अब अपने माँ बाप के यहाँ रहे तो अच्छा होगा। नैना के आते ही उसके ननिहाल के पंडित को बुलाकर एक विशेष हवन यज्ञ हुआ।

पंडित तंत्र मंत्र सिद्ध है और आजकल अपनी सिद्धियों के चलते वो विशेष हवन यज्ञ में मन्त्रों से ही यज्ञकुंड में अग्नि प्रज्वलित करते है और ऐसा ही उन्होंने यहाँ किया। कुंड में घी डालते ही अग्नि प्रज्वलित हो गई तो दूर दराज के मेहमान और स्थानीय भक्त उनकी जयजयकार करके दंडवत करने लगे। लेकिनढोला राम का मित्र अविनाश खामोश बैठा तमाशा देखता रहा और मुस्कराता रहा। वो अपने आप में ही बुदबुदाया, “इस आडम्बर को तो में बिना मन्त्रों के ही कर सकता हूँ…..” उसने कहा तो लेकिन जयकारों में किसी ने सुना नहीं। यज्ञ के बाद भदरू ने पंडित जी से एक सवाल किया कि उनका एक केस काफी समय से कोर्ट में चल रहा है उसका क्या होगा। उन्होंने तफसील बताई कि उसने कर्ज लिया था समय पर हर महीने ब्याज देते रहे और पांच साल की अवधि पूरी होने से पहले ही हम जब पूरा ऋण चुकता करने के लिए गए तो साहूकार घर में रहते हुए मन करवा दिया की वो नहीं है। दरसल वो चाहता था कि पांच साल से एक दिन भी ऊपर हो जाये तो जमीन उसकी हो जायेगी। हर मौके पर उसने ऐसा ही किया और पांच साल बीत गए आज जमीनों के भाव सौ गुना बढ़ चुके है। पचीस हज़ार में जो जमीन हमे रहन राखी थी, आज पचीस लाख की हो गई है। हमने केस किया है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकाल रहा। अब तो उसने केस के चलते हुए ही जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। पंडित जी इस समस्या का कोई उपाय बताये। तो मंदिर से बिना बुलाए पहुंचे एक गुर के चेले ने कहा कि, “यह स्थानीय समस्या है इसके लिए स्थानीय देवता ही इस समस्या का निदान करेंगे। आपकी विद्ध्याओं का हम सम्मान करते है लेकिन मत्रों से अग्निप्रज्वलित करने की शक्ति हमारे गुर में भी है। पिछले दिनों नवरात्री के अवसर पर हमारे गुर ने नौ दिन हर रोज मन्त्रों से अग्नि प्रज्वलित करके नवरात्री के यज्ञ को सम्पन किया था।”पंडित जी बात को समझते है उन्होंने कहा, “यह बात सही है, में तो बिटिया के लिए यहाँ आया हूँ। हमारे यजमान ढोला राम जी के ससुर है और उनके जितने भी धर्म सम्बन्धी कार्य होते है वो हमी करते है। बिटिया का प्रेत बाधा का उपचार, शादी सब हमारे ही हाथों से ही हुई है।आप स्थानीय देवता से ही यह कार्य करवा ले तो ज्यादा उचित रहेगा।”

नैना ने कॉलेज में विधि शास्त्र को पढाई के लिए चुना है और अब वो चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है।इधर साह जी ने एक योजना बना कर स्थानीय मंदिर के गुर से सांठ गाँठ की है ताकि वो इस परिवार से बदला ले सके। क्योकि निर्माण कार्य पर ढोला राम ने कोर्ट से स्टे ले लिया था और वो इन्हें सबक सिखाना चाहता था। गुर को उसका यह प्रस्ताव बहुत फायदेमंद लगा साथ ही इतिहास की बाते कही उभर ना जाये। उन्होंने रागणी को पिशाचनी घोषित करने की बात मान ली। अगर ऐसा हो जायेगा तो हर दृष्टि से उचित ही होगा। बस वो अब मौके की तलाश में है। कुल मिला कर दो लाख में मामला तय हो गया और षड्यंत्र का कार्य शुरू हो गया।

यह बस्ती अंधविश्वासों में जीती है, ढोला राम के पास के परिचित के यहाँ एक बच्चा पैदा होने के बाद मर गया। दरअसलगर्भवती महिला कुछ समय से पीलिया से पीड़ित थी और उसका ईलाज गॉंव के मंदिर के गुर के द्वारा तंत्र मंत्र से किया जा रहा था। यहाँ पहाड़ों पर किसी भी रोग के निदान के लिए मंदिर ही आखिरी उपचार का केन्द्र होता है। कभी कभी कुछ लोग अस्पताल डॉक्टर की शरण में भी चले जाते है तो स्थानीय लोगों को भाता नहीं है। आज प्रसव के समय रागणी भी अच्छे संबंधों के चलते हाज़री लगा आई थी। उसने ही कहा था कि डॉक्टर को बुला लेना चाहिए और शायद उसने ही फोन करके डॉक्टर को बुलाया भी था। डॉक्टर ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जल्दी से शहर के बड़े अश्पताल में ले जाने के लिए हिदायत दी थी। कुछ फौरी उपचार तो उसने कर दिया था। लेकिन इस गंभीर स्थिति में सोचने समझने में काफी देर लगी। ओझा पंडित आदि को बुलवा लिया गया था। उन्होंने तो अपना ही तमाशा शुरू किया कि इस पर किसी गलत स्त्री का साया पड़ा है वर्ना तो ये ठीक ठाक हो गई थी। झाड फूंक पूजा मंत्र के बीच में से ही जब उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे तभी उसकि भी मृत्यु हो गई। बात यही खत्म नहीं हुई उन्होंने माहोल में देख कर एक स्त्री का हुलिया भी ब्यान कर दिया था।जो हुआ था सो हुआ था, लेकिन मंदिर से यह आदेश आया कि एक स्त्री पूर्व के चौथे घर में रहती है वही इसका कारण है। अब तो ये बात सभी जगह फ़ैल गई है। लोगों ने उस स्त्री को बरामद भी कर लिया है और ये बात गुर तक भी पहुँच गई है। जिसे गुर बड़ी गारंटी के साथ मुखर कर रहे है। कि बच्चा होने से पहले जिस स्त्री के बाल खुले थे वो दरअसल डायन है और अभी देखते जाओ क्या क्या होता है। यह बात चलते चलते रागणी तक भी पहुँच गई है उसकी लडकी नैना ने किसी से सुना है। आकार जब बताया तो वो सकते में आ गई। इस वक्त ढोला राम अपने काम पर ही है घर पर नहीं है। रागनी रात भर परेशान रही कि कही लोगों के इशारा उसकी तरफ तो नहीं है। क्योकि खुले बालों में तो वही गई थी। जब उसे यह सूचना मिली थी तो नहा कर अपने बालों को सुखा रही थी। और वो वैसे ही वहां चली गई थी। उसे याद आया कि पिछले दिनों साहूकार जब उनकी जमीन पर निर्माण कार्य करवा रहा था। तब भी वो उसे रोकने के लिए वह गई थी। कहा सुनी भी हुई थी और उसने उसे डायन कहा कर संबोधित किया था। और ये भी चेतावनी दी थी कि देखना में तेरा क्या करता हूँ। जब सुबह हुई तो सुबह उसकी बस्ती से गुजरते गुर जो हमेशा घुमाने जाते है और कभी कभी रागणी से भी मुलाक़ात होती है।उसने गुर को रस्ते में घेर लिया और पूछा कि वो कौन डायन है, जिसे तुम लोगों में चरितार्थ कर रहे हो। सच सच बताना मैंने कई बार साहूकार साह को तुम्हारे साथ देखा है। वैसे सभी जानते है कि तुम जो कुछ चाहो यहाँ कर सकते हो और करते भी हो। याद रखना यदि मेरा नाम आया तो बहुत बुरा होगा। गुर ने उसे घूरते हुए मुस्करा कर जबाब दिया,“मुझे गॉंव और लोगों की फिकर है तेरी भी………।“ और गुस्से में चला गया।

अब लोग रागणी को आते जाते हेय दृष्टि से देखते है। कभी कभी जब वो बाज़ार हाट जाती है तो लोग दूर से देखते ही अपने बच्चों को घर में धकेल देते है। कुछ सयाने शंकित दृष्टि से उसकी नमस्कार तक स्वीकार तक नहीं करते और मुँह फेर लेते है। लगता है लोगों ने गुर की इन चालों को सच मान लिया है और रागणी अब इतना परेशान हो चुकी है कि उसका मानसिक संतुलन भी कभी कभी चला जाता है। वो दिन रात परेशान रहती है। यही नहीं कॉलेज में नैना से भी उसकी सहेलियां कतराने लगी है। आज नैना को उदास देख कर उसी अध्यापिका ने पूछा की क्या बात है? उसने डरते डरते ये सारी बाते अध्यापिका को बताई। तो अध्यापिका दंग रह गई। उसने बताया कि इन लोगों को कानून से ही ठीक करना होगा। तुम चिंता मत करो और माँ को भी बोलना कि मैंने कहा है उसका कानूनी हल निकला जायेगा। जब नैना शाम को लौट कर घर आई तो अविनाश उनके घर पर था। शायद रागणी भाभी को भी वो कानूनी सलाह दे रहा था। उसने फोन करके ढोला राम को फ़ौरन घर आने को कहा। ढोला राम ने बहुत पूछा कि क्या बात है? लेकिन वो परेशान ना हो जाये बस कोई बात है तुम चले आओ। कह कर बात पूरी कर दी।

पूरी बस्ती में अफरा तफरी मची हुई है, घर, चौराहों, दुकानों, गलियों में जिधर देखो बस यही चर्चा है कि इस बस्ती में एक डायन का बसेरा है। वो जिसकी तरफ देख भार लेती है उसके प्राण को देख या सूंघ कर खिंच लेती है। पुरे गॉंव में वो बिमारी, मुशिबतें खड़ी करने पर आमादा है। वो गॉंव खेती को अपनी नज़र से सुखा देगी या फिर बाढ़ ला कर बहा देगी। गुर के चेले चमाटों ने बस्ती में घूम घूम कर ये खबर जो फैलाई है उससे बस्ती में भय की लहर दौडने लगी है। बिना बात के यहाँ त्राहि त्राहि मची हुई है और आने वाले खतरों से पहले ही लोग खतरे से निपटने के लामबंध है।

लोग मंदिर में जमा हो रहे है, इस वक्त गुर पर देवता सवार है और वो चेतावनी दे रहा है। गुर ख्याली शक्ति को इम्पलीमेंट और परफोर्म करने में जी जान से लगे हुए है। उन्हें देख कर लग रहा है जैसे विनाश की बाढ़ को उन्होंने अपनी शक्ति से रोका हुआ है। अब वो गॉंव के नर नारी बच्चों को बचने की अंतिम घोषणा कर रहे है, “धर्म की रक्षा मानव और पृथ्वी की रक्षा के लिए शास्त्रों के अनुसार देवता के आदेश के अनुसार उसे मार मार कर और बालों से घसीट कर हमारे धर्म रक्षक या तो मार दें, या फिर उसे गॉंव से निकाल कर गॉंव को बचा ले। ये धार्मिक आचरण है और धार्मिक कर्तव्य है, इसका पालन फ़ौरन करना होगा।“

लोग अपना कर्तव्य और धर्म निभाने पंचायत घर पहुँच गए, पंचायत के सरपंच को गुर के आदेश से अवगत करवाया तो अंगूठा टेक ग्राम प्रधान महापुरुष ने अपने अहम और दंभ का ऐलान कर दिया कि धर्म की रक्षा के लिए वो स्वयं पंचों के साथ चल कर डायन को गॉंव से एक घंटे में निकाल जाने का आदेश देंगे। उन्होंने एक सभासद से अपना आदेश लिखवाया क्योकि उन्हें तो सिर्फ अपना नाम लिखना आता है। आदेश लिखे जाने के बाद वो पढ़ नहीं सकते केवल हस्ताक्षर कर सकते है। उन्होंने आदेश पर ये कहते हुए हस्ताक्षर कर दिए कि अब पंचायत के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट भी ख़ारिज नहीं कर सकती।

इतफाक की बात है आज इस गॉंव में कानून जाग्रति अभियान के तहत क्षेत्र के न्यायधीश महोदय का पुलिस अधिकारी और कानून वेत्ताओं के साथ दौरा है। ये दल जब पंचायत भवन पहुंचा तो वह सन्नाटा छाया हुआ था, चौकीदार से दरयाफ्त करने पर पता चला कि प्रधान जी सभासद और कुछ लोग किसी अर्जेंट काम से डायन को फरमान जारी करने गए हुए है। आगे पूछने पर पता चला कि वो डायन ढोला राम की पत्नी है और वो फलानी फलानी जगह पर रहते है। न्यायधीश महोदय ने समय की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारीयों से बातचीत की और निकाल गए।

इधर पंचायती फरमान जारी करने के लिए धर्म रक्षकों के साथ पंच और प्रधान जब ढोला राम के घर पहुंचे तो वहां ताला लगा पाया। पूछने पर पता चला कि ढोला राम और उसका परिवार कुछ लोगों के साथ देवता के मंदिर पर गया हुआ है।

ढोला राम, भदरू, अविनाश, नैना और उसकी विधि अधियापिका, मंगलू शर्मा वकील, रागणी और कुछ और व्यक्ति मंदिर में पहुंचे ही थे कि पंचायत के कारिंदे, धर्म रक्षकों के हुजूम के साथ मंदिर पर आ धमके पंचायत के प्रधान जी ने ढोला राम को पंचायत का आदेश थमा दिया आदेश को पढ़ा गया। ढोला राम की तरफ से आये वकील शर्मा जी ने प्रधन को समझाया कि ये जो कुछ भी किया जा रहा है यह सर्वथा गैर कानूनी है। कानून की नज़र में किसी भी महिला को डायन मुकरर करना या घोषित करना अपराध है और ये अपराध कोग्निजेबल एवं नॉन बेलेबल अपराध है। उनकी बात सुन कर गुर महोदय आँखे तरेरते हुए बोले, “धर्म की रक्षा करना अपराध है…. वाह… अरे मुर्ख क़ानून धर्म से बड़ा नहीं हो सकता। ये देवता का आदेश है….. समझे? धर्म की दृष्टि में ये औरत डायन है और डायन का जीवित रहना या गॉंव में बसना लोगों के हित में नहीं है.. अधर्म है.. धर्म की जय हो.. अधर्म का नाश हो… ।”

रागणी से ना रहा गया और वो गुर महाराज के सामने आकर खड़ी हो गई, “आप स्वयं षड्यंत्रकारी, आडम्बरी और अपराधी है, आपके सारे अपराध और आडम्बर में ही नहीं गॉंव की हर औरत जानती है।“ गुर के चेले और धर्म रक्षक क्रोध में इसकी प्रतिक्रिया करने लगे। एक चेला गुर के पैर छू कर जोर जोर से क्रोध में बोलने लगा, “देवता के बाद गुर का स्थान है, भगवन के बाद गुर का स्थान है और ये डायन गुर को अपराधी और अधर्मी कह रही है। संसार का रहस्य और ज्ञान का भंडार है गुरु जी, उन्होंने अपनी तपस्या से शक्तियों को वश में किया है। उनके पास असीम शक्तियाँ है वो हवन कुंड में मन्त्रों की शक्ति से आग प्रज्वलित कर सकते है, वो बेमौसम पानी बरसा सकते है, बाढ़ को एक इशारे से रोक सकते है, जिसके पास ऐसी आपार शक्तियां हो उसे ये डायन अपराधी षड्यंत्रकारी बता रही है… मारो इस डायन को… मार दो… । तभी नैना ने आगे बढ़ कर चेतावनी दी, “ख़बरदार अगर किसी ने मेरी माँ को हाथ भी लगाया।“ ढोला राम ने भी चेतावनी दी और सभी ने रागणी को घेरे में ले लिया. । तभी अविनाश ने ऊँची आवाज में कहा, इन गुर महाराज की सीढियों का आज में खुलासा करूँगा। इनकी पोल खोल के ही रहूँगा। भाइयों और बहनों मैं आपके ही सामने बिना मंत्र तंत्र के हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करके दिखाऊंगा। तब तो आप इन्हें आडम्बरी मान लेंगे? तब क्या आप मान लेंगे कि ये इनका आडम्बर है। मंत्र और तंत्र की शक्ति केवल मुर्ख बनाने का ढोंग है।“ गुर ने आवेश में आदेश दिया, “यह अधर्मी पागल है इसके साथ इसे भी मार डालो।“ तभी एक बुजुर्ग ने कहा,”रुको भाइयों अभी नहीं.. इसने जो कहा उसे कर के ना दिखाया तो इसे मैं मारूंगा। या फिर ये गॉंव छोड़ कर चला जायेगा।“ धर्म रक्षकों ने सहमति जताई और आवाज आई,”अरे दिखा दिखा अपनी शक्ति… ।”

अविनाश ने अपने घर फोन करके पत्नी से कुछ सामान मंगवाया और बिना मन्त्रों की शक्ति के बिना नाटक किये हवन कुंड में आग प्रज्वलित करके दिखा दी। तो लोग अपना सा मुँह लेकर रह गए। उसने बताया कि ये आडम्बरी लोग सामग्री के अंदर पोटेशियम पर्माग्नेट मिला देते है और घी के जगह दही जैसा एक पदार्थ जिसे ग्लीसरीन कहा जाता है उसे मन्त्रों का आडम्बर करने और समां बाधने के बाद हवन कुंड में डालते है और ग्लीसरीन डालते ही वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत आग भड़क उठती है और बेचारे भक्त लोग समझते है कि गुर के पास सिद्ध शक्ति है। रुकिए में इस से भी बड़ा चमत्कार दिखता हूँ। बिना सामग्री, घी आदि प्रयोग किये। उसने घर से मंगवाए थैले में से घास निकाली और सब को दिखा कर जमीन पर रख दी। एक लोटे में पानी मंगवाया और ज्यों ही पानी के छींटे उस घास पर डाले उस में से आग भड़क उठी। सभी लोग हतप्रभ एक दूसरे का मुँह देखने लगे। गुर महाराज और चेले जो मुंडी नीचे किये बैठे थे वो चलने को हुए तो अविनाश ने उन्हें रोका और कहा, “सिद्ध गुर महाराज मैं आपकी शक्तियों का राज तो बता दूँ?” उसने बताया कि घास पर पहले से ही सोडियम लगा कर रखा गया था। सोडियम और हाइड्रोजन के मिलते ही आग जलने लगती है। पानी असल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण के बना एक तरल पदार्थ होता है। इसलिए पानी के छींटे सोडियम पर पड़ते ही आग भभक उठती है। अब समझ में आया इन महापुरुषों की तंत्र मंत्र की शक्ति का तपस्या द्वारा अर्जित ढोंग? सभी लोगों की नज़रें गुर महाराज की तरफ गई तो वो उठ कर चलने लगे। तभी रागणी ने आगे आकर कहा,”मेरे भाइयों सगे सम्बन्धियों आप लोगों ने इनके चमत्कार तो देख ही लिए अब जब में इनके राज खोलूंगी तो तय करना कि किसको मारना चाहिए और किसको फंसी की सजा होनी चाहिए।“ तभी पीछे से कुछ गुर के गुंडे और चेले लाठी, डंडा, बालम लिए भीड़ में से निकले और सामने से आती पुलिस और न्यायधीश महोदय को देख कर स्तब्ध हो गए। दरअसल इस बीच भीड़ से निकल कर नैना ने अपने मोबाइल फोन से पुलिस मुख्यालय के पास रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी कि यहाँ के लोग और गुर उसकी मां को डायन करार दे कर मार डालने के लिए तैयार खड़े है। उसने पुलिस अधीक्षक से भी फोन पर बात करके इसकी सुचना दे दी थी और पुलिस अधीक्षिक महोदय ने स्थानीय पुलिस चौकी के थाना प्रभारी को और SDM  से बात कर ली थी। चूँकि ये सब लोग गॉंव में तो मौजूद थे ही फ़ौरन मौके पर पहुँच गए।

पुलिस अधिकारी ने सभी को अपनी जगह पर ही खड़े रहने का आदेश दिया और बताया कि न्यायधीश महोदय भी हमारे साथ है जो कुछ यहाँ हो रहा है उसकी हमे जानकारी है। उन्होंने ढोला राम के परिवार को बुलाया तभी वकील साहब ने आगे बढ़ कर अभिवादन किया और न्यायधीश महोदय से कहा, “माननीय न्यायधीश महोदय यह ढोला राम जी की पत्नी है। इनके ब्यान सुन लिए जाये और दोषियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाये।“ न्यायधीश महोदय ने रागणी से ब्यान देने के लिए कहा।

रागनी ने अपने ब्यान में शादी से लेकर अब तक की पूरी घटनाएँ बता दी कि कैसे उसकी शादी कुत्ते से की गई, यहाँ आकार देवताओं के साये और प्रेत आत्माओं के साये का ढोंग रचा कर उसका मानसिक, भावनिक और शारीरिक शोषण किया गया। उसकी मानसिक परिस्थितियों और घरेलु व्यवस्था की भूमि पर संबंधों का आतंरिक चित्रण भी उसने प्रस्तुत किया। किस तरह वो मानसिक यातना और भावनिक द्वन्द से वो गुजारी। उसने बिना कुछ छिपाए वो सारा ब्यान कर दिया और अभी हाल की घटनाओं जिसमें वो केवल संबंधों के कारण गर्भवती स्त्री को देखने गई और फिर उसकी बिमारी का ओझा उपचार और देवता उपचार हुआ जिसमें उसकी मृत्यु हो गई। साथ ही साहूकार और कर्ज की वो सारी बाते उसने तफसील से ब्यान की। साहूकार से मैं-मैं, तू-तू होने पर उसकी चेतावनी और गुर के साथ मिल कर उसे डायन घोषित करने का खुलासा भी उसने किया और अंत में कहा, “यह धार्मिक सामाजिक व्यवस्था जो सिर्फ हमारी जिंदगी को बिगाडने का खेल है, लोगों से जिंदगी से खिलवाड़, अंधविश्वासों को ना मानने पर देवता का स्वांग भर कर उन्हें दबाते रहने और शोषण की प्रक्रिया जारी रखने का यह खेल कहा तक मानवीय है, कहा तक इंसानी जिंदगी के लिए माकूल है जहाँ धर्म के आडम्बर और इस तरह की धार्मिंक व्यवस्था को धर्म कह के थोप दिया जाता है। अगर ये धर्म है तो ऐसे धर्म को आज सबकुछ भुगतने के बाद मैं इसकी अवमानना करती हूँ। शायद कोई कानून हमारी जिंदगी से जो खिलवाड़ चल रहा है उसे रोक सके तो एक बहेतर व्यवस्था बेहतर इंसान की पैदावार होने की सम्भावना है। महोदय, मेरे साथ जो कुछ भी हुआ वो शायद यहाँ सब के साथ होता है और वो धर्म की अंधी गलियों में सर टकरा टकरा कर तडफ तडफ कर जिंदगी गुजारने और गुजारते रहने को मजबूर है। आप कानून के रखवाले है मैं चाहती हूँ कि इस दोषी गुर को वो सजा दी जाये जो एक अत्याचारी को दी जाती है। इस में हमारा जीवन जीते हुए हमारे से छीन लिया है हमारी खुशियाँ हमारे मानवीय संबंध हमारी इंसानी जिंदगी का वो ख्बाव जिसे में घर बसाने से पहले देखा था।“ ये कह कर वो अपने आंसुओं को रोक ना सकी और ढोला राम से लिपट गई, “मुझे बताओ इस में मेरी कोई गलती है क्या?’ ढोला राम गुस्से में थर थर काम्पने लगा और ज्यों ही वो गुर की तरफ बढ़ा न्यायधीश महोदय ने आदेश दिया, “ये तुम्हारा मामला नहीं अब कानून का मामला है।“ उसने रागणी से एक सवाल किया, “रागणी, क्या तुम कोई सबूत पेश कर सकती हो कि तुम्हारा षड्यंत्र रच कर शारीरिक शोषण गुर ने किया?”

“जी हाँ मैं ऐसा सबूत दे सकती हूँ जो मिटाया नहीं जा सकता। ये मेरी बेटी नैना इन गुर महाराज की ही संतान है। आप इनका डीएनए टेस्ट करवा कर जांच करवा ले।“ न्यायधीश महोदय ने वकील शर्मा की तरफ देखा और शर्मा जी ने कहा, “जी हाँ मेरी आपसे प्रार्थना है कि गुर महाराज के खिलाफ छानबीन करके सभी अपराधिक धाराओं के तहत मुजरिम बना कर कार्यवाही की जाये। यहाँ मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि यौन शोषण का ब्यान आपके के सामने स्वयं पीडिता ने दिया है, इन्हें इस केस में तुरंत गिरफ्तार किया जाये और डायन घोषित करने के मामले में भी इन्हें और इनके सहयोगियों को गिरफ्तार करने की माननीय न्यायधीश महोदय से मेरी प्रार्थना है।“ उन्होंने केस के संबंध में सारी धारों और विधि नियमों का विवरण दे कर पुन: दोहराया, “न्यायधीश महोदय, कानून के मद्देनज़र इनकी तुरंत गिरफ्तारी कानून के हक मैं है। समाज और पीडिता को न्याय दिलाने में बहुत जरुरी है कृपया इन्हें गिरफ्तार करके इनके डीएनए टेस्ट की कार्यवाही का आदेश दें।“

न्यायधीश महोदय ने पुलिस अधिकारी से तुरंत गुर महाराज को गिरफ्तार करने का आदेश दिया साथ ही आदेश दिया कि वो चेलों को भी गिरफ्त में ले ले और कल कोर्ट में पेश करे। पुलिस अधिकारी ने आदेश का पालन किया। जब वो गिरफ्तार करके ले जा रहे थे तभी नैना ने गुर को हिकारत की नज़र से देख कर थूक दिया और अपनी माँ और ढोला राम से लिपट गई।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s