Promoters of Irreligiousness

©-Amar Sneh

Weary and tired of nasty round the clock sound pollution of highway traffic, I came down to a hilly village in search of peace and calmness. First time when I came here looking out for a house, I was enthralled and charmed by the picturesque panorama of this village and then a thought ran through my mind that there cannot be any other place as apt and perfect as this for constructive work, but the first morning itself my avarice for peace shattered and I felt my stored experience of life is futile; thinking, “I do not have a pinch of wisdom to realize that there is a temple right atop my house, which I chose for tranquility.” Continue reading

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मास्टर जी

-अमर स्नेह

‘सास्त्रों (शास्त्रो) में लिखा है।’’ उनका तकिया कलाम बन चुका है। एक दिन एक शरारती लड़के ने उनकी खिल्ली उड़ाने की गरज़ से चार लोगों के सामने उनसे पूछ लिया, ‘‘क्यों गुरूजी आपने कौन-कौन से शास्त्र पढ़े हैं तो उन्होने धरती सरपे उठा ली, ’’अधम नीच तेरी इतनी हिम्मत कि तू मेरा इम्तिहान ले, अच्छा है ये कलयुग है कोई और युग नहीं है वर्ना खड़े-खड़े गुरु को अपमानित करने के अपराध में स्वयं भसम़ हो जाता। ……खैर कलयुग में तो गुरूओं का अपमान होना ही है सास्त्रों में लिखा ही है।’’ -लड़का उनके टालने की ट्रिक की प्रतिक्रिया में व्यंगात्मक भाव भंगिमाएँ बनाता रहा। मास्टर जी उसका मन्तव्य भाँप गए और उन्होने खिसिया कर कहा, ‘‘अरे जा तू मुझसे बड़ा बस, अपने बाप से भी बड़ा, अरे ब्रह्मा से भी बड़ा जा……।’’ Continue reading

अधर्म विस्तारक

नेशनल हाईवे के चैबीस घन्टे के कोलाहल से तंग आकर शान्ति की आस में मैं यहाँ एक पहाड़ी गाँव में आ गया। जब मैं पहली बार यहाँ मकान देखने आया था तो नयनाभिराम दृश्य को देख ये सोच लिया था कि रचनात्मक कार्यो के लिए इससे उपयुक्त स्थान कोई हो ही न सकता। लेकिन पहली सुबह ही मेरा मोह भंग हो गया। मुझे लगा कि मेरे पूरे जीवन का अनुभव बेमानी है मुझे इतनी भी अक्ल नहीं कि कम से कम ये तो देख लेता कि इस मकान के ठीक ऊपर मंदिर है।

       सुबह साढ़े चार बजे मैं नहा धोकर योगाभ्यास के लिए तैयारी कर ही रह था कि एक बेसुरी गगन भेदी आवाज ने पूरे वातावरण की एैसी तैसी कर दी। एक तो बेताली भोंडी वाणी दूसरे राष्ट्रभाषा हिन्दी के उच्चारण का जनाजा साथ धर्म-विस्फोटक (लाऊडस्पीकर) का फुल बॉलयूम। मैं बेवस होकर बैठ गया और इंतजार करने लगा कि महाराज थक कर चुप हो जायगे लेकिन एैसा नहीं हुआ- देसी घी और फल मेवा दुध खाकर पीकर पली सजी संवरी एनर्जी हमारे पूर्व जन्मो के पापों का इंतकाम ले रही थी। Continue reading